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एक घंटा पहले
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गैंगरेप मामले में सामने आई रिश्वत की खौफनाक परतें
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अजरबैजान की एक 20 वर्षीय महिला के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने देश की न्याय व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने खुलकर मुख्य आरोपी अहमद तनवीर और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने यह आरोप लगाकर हलचल मचा दी है कि इस मामले में आरोपी को जमानत दिलाने के लिए संबंधित जज को भी रिश्वत दी गई थी। मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि आरोपी ने पीड़िता का मुंह बंद करने और शिकायत वापस लेने के लिए उसे भारी-भरकम धनराशि की पेशकश की थी।
क्या है पूरा मामला और पीड़िता की आपबीती
पुलिस के दस्तावेजों के अनुसार, अजरबैजान की राजधानी बाकू की रहने वाली यह 20 वर्षीय महिला इस साल सितंबर के मध्य में व्यापारिक सिलसिले में पाकिस्तान पहुंची थी। घटना 25 सितंबर की है, जब वह लाहौर के डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (DHA) इलाके में मौजूद थी। पीड़िता के मुताबिक, वहां दो महिलाएं उसे एक कैफे में ले गईं, जहां तीन और पुरुष शामिल हो गए। इसके बाद इन लोगों ने उसे और उसकी दो अन्य महिला साथियों को घर छोड़ने के बहाने अपनी गाड़ी में बैठा लिया।
आरोप है कि गाड़ी में ले जाने के बाद वे उसे एक फ्लैट पर ले गए। वहां शराब पीने का दौर चला और इसके बाद महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो पुरुष आरोपियों और दो महिलाओं को हिरासत में ले लिया था, जबकि मुख्य आरोपी अहमद तनवीर अग्रिम जमानत पर बाहर चल रहा था।
दो करोड़ रुपये की रिश्वत और न्याय पर खतरा
मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा कि कोई भी अपराधी केवल पैसे के दम पर कानून की पकड़ से नहीं बच सकता। मरियम ने खुलासा किया कि आरोपी के परिवार ने पीड़िता को बयान बदलने और मामले को रफा-दफा करने के लिए 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपये यानी लगभग 72,000 अमेरिकी डॉलर देने की कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि महिला का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत पहले ही दर्ज किया जा चुका था, जिसके बावजूद उस पर दबाव बनाया गया।
मरियम नवाज ने आगे कहा कि उन्हें यह जानकारी मिली है कि आरोपी को जमानत देने वाले जज को भी कथित तौर पर रिश्वत दी गई थी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पाकिस्तान की पूरी न्याय प्रणाली के लिए बेहद शर्मनाक और चिंताजनक स्थिति है। यह स्पष्ट करता है कि कैसे सत्ता और धन का उपयोग करके दुष्कर्म जैसी संगीन वारदातों में पीड़िताओं को दबाया जाता है।
अदालत परिसर के बाहर हाई वोल्टेज ड्रामा
शुक्रवार को जब आरोपी अहमद तनवीर अपने वकील के साथ अतिरिक्त जिला और सत्र जज रफाकत अली गोंडल की अदालत में पेश हुआ, तो एक बार फिर नाटकीय स्थिति देखने को मिली। आरोपी के वकीलों ने कोर्ट में एक वीडियो बयान पेश किया, जिसमें पीड़िता कथित तौर पर अपने पुराने आरोपों से पीछे हटती हुई दिखाई दे रही थी। इस पर जज ने आरोपी की अग्रिम जमानत की अवधि मंगलवार तक बढ़ा दी।
अदालत में जब आरोपी की ओर से डर जताया गया कि पुलिस उसे हिरासत में ले सकती है, तो जज ने सुरक्षा गार्डों को आदेश दिया कि वह आरोपी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालें। हालांकि, जैसे ही तनवीर अदालत के गेट से बाहर निकला, पुलिस ने उसे दबोच लिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और आरोपी के समर्थकों के बीच जमकर हाथापाई हुई, जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है। पुलिस ने आरोपी के साथ-साथ उसके कई सहयोगियों को भी मौके से गिरफ्तार किया है।
परिवार का आरोप और भविष्य की आशंकाएं
उधर, आरोपी अहमद तनवीर के पिता ने पंजाब पुलिस के अपराध नियंत्रण विभाग (CCD) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को गैरकानूनी तरीके से पकड़ा गया है। उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की है कि पुलिस उनके बेटे को किसी फर्जी मुठभेड़ का शिकार बना सकती है। बहरहाल, मरियम नवाज के इस सख्त रुख के बाद अब इस पूरे मामले पर देश भर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि एक तरफ न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता दांव पर है, तो दूसरी तरफ पीड़िता को मिल रही धमकियों और रिश्वत की पेशकश ने इसे एक बेहद पेचीदा मामला बना दिया है।
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