क्रिकेट
एक घंटा पहले
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क्रिकेट की दुनिया में जब भी कलाई के स्पिनरों का जिक्र छिड़ता है, तो सबसे पहला नाम महान शेन वॉर्न का ही जेहन में उभरता है. टेस्ट और वनडे को मिलाकर 1000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय विकेट अपने नाम करने वाले इस गेंदबाज को क्रिकेट के पूरे इतिहास का सर्वश्रेष्ठ लेग-स्पिनर माना जाता है. मगर उनके इस शानदार सफर की नींव और दुनिया को दंग कर देने वाला वह यादगार पल आज ही के दिन, यानी 4 जून 1993 को आया था. उन्होंने ऐसी एक गेंद फेंकी जो आगे चलकर 'बॉल ऑफ द सेंचुरी' के नाम से अमर हो गई.
वह दिन जब बदल गई वॉर्न की किस्मत
यह मुकाबला इंग्लैंड के मैनचेस्टर स्थित 'ओल्ड ट्रैफर्ड' मैदान पर खेला जा रहा था. यह 1993 की एशेज सीरीज का पहला टेस्ट था और इंग्लैंड की जमीन पर एशेज में यह वॉर्न के करियर की सबसे पहली गेंद थी. उन्होंने अपनी इस कमाल की गेंद पर इंग्लैंड के अनुभवी बल्लेबाज माइक गेटिंग को पवेलियन की राह दिखाई.
शुरुआती दौर में फीका रहा था रिकॉर्ड
शेन वॉर्न की लेग-ब्रेक जितनी जानलेवा थी, उनकी गुगली को समझ पाना बल्लेबाजों के लिए उतना ही टेढ़ा काम था. हालांकि करियर के आरंभिक दिनों में उनके आंकड़े कुछ खास नहीं थे. साल 1993 में इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली एशेज सीरीज से पहले वॉर्न ने सिर्फ 11 टेस्ट खेले थे और उनके नाम महज 31 विकेट दर्ज थे.
भारत के विरुद्ध अपने डेब्यू टेस्ट में तो उन्होंने 150 रन लुटाकर केवल 1 ही विकेट हासिल किया था. लेकिन ओल्ड ट्रैफर्ड के इस टेस्ट में जो कुछ हुआ, उसने क्रिकेट के इतिहास का रुख ही मोड़ दिया.
क्यों कहा गया इसे 'सदी की गेंद'
गेंद लेग स्टंप के बाहर टप्पा खाकर पिच हुई और इतनी तेज टर्न लेकर अंदर आई कि उसने गेटिंग का ऑफ स्टंप उखाड़ दिया. हैरान बल्लेबाज देखता रह गया और यह नजारा देखने वाले हर शख्स के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था. यही वजह रही कि इस असाधारण गेंद को 'बॉल ऑफ द सेंचुरी' का खिताब मिला.
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