ओडिशा में खौफनाक वारदात: सोने की मूर्ति के लालच में व्यक्ति को चारपाई से बांधकर जिंदा जलाया भारत 2 घंटे पहले 4
ओडिशा के पुरी जिले में एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या का मामला सामने आया है, जहां सोने की मूर्ति और गहनों के विवाद के चलते आरोपियों ने उसे चारपाई से बांधकर जिंदा जला दिया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुरी में रोंगटे खड़े कर देने वाली हत्या

ओडिशा के पुरी जिले से एक अत्यंत विचलित करने वाली और खौफनाक घटना सामने आई है। यहाँ कनास इलाके में एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हत्या का कारण कोई मामूली विवाद नहीं, बल्कि सोने की मूर्ति और गहनों का लालच बताया जा रहा है। अपराधियों ने दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए मृतक के हाथ और पैर चारपाई से बांध दिए और फिर उसे जिंदा जला दिया। इस हत्याकांड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले के तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है। मृतक की पहचान परशुराम प्रधान के रूप में की गई है।

घटना का विवरण और आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह वीभत्स घटना 11 अगस्त को कनास थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मंदराबस्त गांव में अंजाम दी गई थी। जांच एजेंसियों को पता चला है कि आरोपियों ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से परशुराम को काबू किया। आरोपियों ने पीड़ित के हाथ और पैर चारपाई से मजबूती से बांध दिए, ताकि वह हिल न सके और फिर उस पर केरोसिन डालकर आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया है और तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान खुर्दा जिले के तापंग निवासी राजकिशोर साहू और सुरेश साहू के साथ-साथ केंद्रापड़ा के रहने वाले सत्यव्रत मल्लिक के रूप में हुई है। वर्तमान में पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की गहनता से पड़ताल कर रही है कि घटना से पहले और बाद में क्या-क्या गतिविधियां हुईं।

हत्या के पीछे का पूरा घटनाक्रम

पुलिस की शुरुआती जांच ने इस पूरे अपराध की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले की जड़ें एक पुराने विवाद से जुड़ी हैं। शुरुआत में राजकिशोर साहू ने परशुराम प्रधान से संपर्क किया था और अपने भाई के प्रेम संबंधों को समाप्त करवाने के लिए उसकी मदद मांगी थी। उस समय राजकिशोर ने इस काम के एवज में परशुराम को 19 हजार रुपये दिए थे। हालांकि, समय बीतने के साथ ही इस व्यक्तिगत विवाद ने एक खतरनाक मोड़ ले लिया और इसमें सोने की मूर्ति एवं बेशकीमती गहनों का लालच शामिल हो गया।

पुरी के एसपी प्रतीक सिंह के बयानों के मुताबिक, बाद में परशुराम ने राजकिशोर को यह विश्वास दिलाया कि जमीन के एक खास हिस्से में एक बर्तन दबा हुआ है, जिसमें सोने की मूर्तियां और गहने मौजूद हैं। इस लालच में आकर राजकिशोर ने उस खजाने को निकालने की योजना बनाई। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान परशुराम ने राजकिशोर से करीब 2 लाख रुपये की भारी भरकम राशि ऐंठ ली। राजकिशोर को उम्मीद थी कि जमीन के नीचे दबे सोने के बर्तन मिलते ही उसकी किस्मत बदल जाएगी।

हालांकि, जब बताए गए स्थान पर खुदाई की गई तो वहां किसी प्रकार की सोने की मूर्ति या गहने नहीं मिले। इसके बाद राजकिशोर ने परशुराम से अपने पैसे वापस लौटाने की मांग की। पुलिस के अनुसार, परशुराम पैसे वापस करने की स्थिति में नहीं था, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच तनाव काफी बढ़ गया। विवाद के चरम पर पहुंचने के बाद राजकिशोर ने सुरेश साहू और सत्यव्रत मल्लिक के साथ मिलकर परशुराम को रास्ते से हटाने की साजिश रची। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कृत्य थी। गौरतलब है कि इससे पहले भी ओडिशा के कंधमाल जिले से एक ऐसी ही दर्दनाक खबर सामने आई थी, जहां खेती करने से मना करने पर दो भतीजों ने मिलकर अपने चाचा की जान ले ली थी।

जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई

पुलिस की टीमें अब इस पूरे हत्याकांड की कड़ियों को एक-दूसरे से जोड़ने के काम में जुटी हुई हैं। पुरी एसपी प्रतीक सिंह ने बताया कि जांच के दौरान जब पुलिस ने घटनाक्रम का विश्लेषण किया, तो तीनों संदिग्धों की पहचान पुख्ता हो गई, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई। पुलिस अब इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या की इस पूरी योजना को अंतिम रूप कब दिया गया और इस अपराध में किस आरोपी की क्या भूमिका थी। पुलिस का मानना है कि पैसे के लेन-देन और कथित खजाने के लालच ने इस विवाद को इतना गंभीर बना दिया कि अंततः एक व्यक्ति की जान चली गई। वर्तमान में तीनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना का पूरा सच सामने आ सके और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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