NTA में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 600 विशेषज्ञों की छुट्टी, चार-स्तरीय जांच और CISF की सुरक्षा का घेरा राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 5
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में आमूलचूल बदलाव करते हुए बड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं, ताकि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को फिर से बहाल किया जा सके।

NTA की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA को लेकर देशभर में चल रहे विश्वास के संकट के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक के बाद एजेंसी के कामकाज को पारदर्शी और चुस्त बनाने के लिए बड़े फैसलों पर मुहर लगाई गई है। सरकार अब केवल मामूली सुधारों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि संस्थागत साख को वापस पाने के लिए कड़े प्रशासनिक पुनर्गठन की राह पर चल पड़ी है।

600 विशेषज्ञों को हटाया गया

एग्जाम सिस्टम में सबसे संवेदनशील हिस्सा प्रश्न-पत्र तैयार करने और उनकी गोपनीयता बनाए रखने का होता है। NTA ने एक साथ 600 विशेषज्ञों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि व्यवस्था के भीतर कहीं न कहीं खामियां गहरी थीं। इन पुराने विशेषज्ञों को हटाकर अब नए विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य डेटा लीक जैसी संभावनाओं और हितों के टकराव के मामलों को जड़ से खत्म करना है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन नए चेहरों का चयन किस तरह से पारदर्शी बनाया जाएगा।

सुरक्षा के लिए चार-स्तरीय प्रणाली

प्रश्न-पत्रों और उत्तर-पुस्तिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने चार-स्तरीय जांच प्रणाली यानी फोर-टियर चेकिंग मैकेनिज्म लागू करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था मानवीय और तकनीकी गलतियों को न्यूनतम करने के इरादे से बनाई गई है। जब किसी भी दस्तावेज को चार अलग-अलग स्तरों पर बारीकी से परखा जाएगा, तो गड़बड़ी की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

CISF की सुरक्षा और दफ्तरों का स्थानांतरण

NTA अपनी कार्यप्रणाली को अभेद्य बनाने के लिए अपने कार्यालयों को नई जगह शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। इन दफ्तरों की सुरक्षा का जिम्मा अब CISF के हाथों में होगा। एजेंसी का लक्ष्य अपने परिसर को एक हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में तब्दील करना है ताकि बाहरी हस्तक्षेप या आंतरिक सेंधमारी जैसी घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।

प्रशासनिक मजबूती की दिशा में भर्ती

एजेंसी के भीतर अधिकारियों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। शिक्षा मंत्रालय ने इस पर ध्यान देते हुए आगामी 2-3 हफ्तों के भीतर 20 से 25 नए और अनुभवी अधिकारियों को नियुक्त करने का फैसला किया है। इसके अलावा कैडर समीक्षा की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, जिससे एजेंसी प्रशासनिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सके। कुल मिलाकर, शिक्षा मंत्रालय के ये सभी कदम कागजों पर तो काफी सख्त और फुल-प्रूफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन लाखों परीक्षार्थियों के लिए असली कसौटी इनका जमीन पर सही तरीके से लागू होना है। क्या इन सुधारों से NTA पर लगे दाग धुल पाएंगे, यह आने वाली परीक्षाओं के निष्पक्ष और निर्विवाद आयोजन से ही स्पष्ट हो पाएगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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