UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, नीति वापस नहीं होगी व्यापार एक घंटा पहले 5
सरकार ने ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR चार्ज लागू रखने का निर्णय लिया है और इसे वापस लेने से इनकार कर दिया है।

सरकार ने MDR चार्ज पर अपना रुख स्पष्ट किया

₹2,000 से अधिक के यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने के मामले में सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। देश भर के दुकानदारों, व्यापारियों और कुछ विपक्षी दलों की ओर से हो रहे विरोध के बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि इस नीति को बदलने या वापस लेने का कोई विचार नहीं है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह फैसला डिजिटल भुगतान प्रणाली को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और अनिवार्य कदम है।

बुधवार को जब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी से इस संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस फैसले को पलटने की कोई संभावना नहीं है। सरकार का मानना है कि यह निर्णय पूरे यूपीआई इकोसिस्टम के हित में लिया गया है। विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस की तरफ से उठाए जा रहे अमेरिकी दबाव वाले सवालों को खारिज करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि नया MDR फ्रेमवर्क यूपीआई को वित्तीय दृष्टि से मजबूत और तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

संसदीय समिति की राय और वित्तीय कारण

वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति ने अपनी 32वीं रिपोर्ट में इस विषय पर महत्वपूर्ण चेतावनी दी थी। समिति का कहना था कि अब तक चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था के कारण सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सरकार को हर वर्ष लगभग ₹2,000 करोड़ की बजटीय सहायता देनी पड़ती थी। पैनल ने स्पष्ट किया था कि यूपीआई को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए सरकारी सब्सिडी के बजाय एक मजबूत राजस्व मॉडल की आवश्यकता है।

ग्राहकों पर असर और भविष्य की योजना

पिछले छह वर्षों से यूपीआई का उपयोग पूरी तरह निशुल्क रहा है, ऐसे में यह बदलाव काफी चर्चा में है। हालांकि सरकार ने आम जनता और छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि इसका बोझ ग्राहकों पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। मर्चेंट डिस्काउंट रेट का भुगतान केवल दुकानदारों को करना होगा।

  • आम ग्राहकों के लिए किसी प्रकार का मासिक कोटा या सीमा तय नहीं की गई है।
  • पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज लागू नहीं होगा।
  • ₹2,000 से कम के छोटे मर्चेंट पेमेंट्स भी पूर्व की तरह निशुल्क बने रहेंगे।

सरकार का कहना है कि MDR के माध्यम से जो राशि एकत्रित होगी, उसका उपयोग ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में डिजिटल पेमेंट की पहुंच बढ़ाने और सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप