निमरत कौर ने बयां किया पिता की शहादत का दर्द, नकली वर्दी में आए आतंकियों ने किया था अपहरण मनोरंजन 2 घंटे पहले 4
अभिनेत्री निमरत कौर ने अपने पिता मेजर भूपेंद्र सिंह के निधन से जुड़ी दर्दनाक यादें साझा की हैं, जिन्हें 32 साल पहले आतंकियों ने बंधक बनाकर मार डाला था।

पिता की शहादत और परिवार का संघर्ष

बॉलीवुड अभिनेत्री निमरत कौर ने अपने पिता मेजर भूपेंद्र सिंह की शहादत के तीन दशक पुराने जख्म को फिर से ताजा किया है। मेजर भूपेंद्र सिंह की मृत्यु को अब 32 साल बीत चुके हैं। जब आतंकवादियों ने उनके पिता की निर्मम हत्या की, उस वक्त निमरत केवल 11 साल की थीं। अभिनेत्री ने एक भावुक बातचीत में उस घटना को याद करते हुए बताया कि कैसे एक सामान्य सुबह उनके पिता काम पर निकले और सात दिनों के बाद वे केवल एक ताबूत में वापस लौट सके। 1994 की इस घटना ने निमरत और उनके परिवार की दुनिया पूरी तरह बदलकर रख दी थी। इस कठिन समय में निमरत की मां ने साहस दिखाते हुए उन्हें और उनकी बहन की परवरिश की और बिखरते परिवार को फिर से संवारा।

भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी थे मेजर भूपेंद्र सिंह

मेजर भूपेंद्र सिंह भारतीय सेना में कार्यरत थे और उन दिनों कश्मीर में तैनात थे। वर्ष 1994 में जब वे अपनी ड्यूटी से वापस लौट रहे थे, उसी समय आतंकियों ने उन्हें अपना निशाना बनाया। आतंकियों ने पहले उनका अपहरण किया और फिर उनकी हत्या कर दी। देश के प्रति उनके बलिदान और साहस के लिए मेजर भूपेंद्र सिंह को मरणोपरांत प्रतिष्ठित शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।

ताबूत में पिता को देखकर थम गई थी दुनिया

एक प्रमुख समाचार एजेंसी के साथ साक्षात्कार में निमरत कौर ने अपने पिता की आखिरी झलक के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें साफ याद है कि कैसे उस सुबह उनके पिता ड्यूटी पर गए थे। उसके बाद, जब उन्होंने उन्हें देखा, तो वे एक ताबूत में बंद थे। निमरत कहती हैं कि उनके परिवार को कभी भी उस दुखद अंत के बाद 'क्लोजर' यानी मन की तसल्ली नहीं मिल सकी। अभिनेत्री ने दुख जताते हुए कहा कि हालांकि दशकों बीत चुके हैं, लेकिन आज भी ऐसी कोई चीज नहीं है जो उस कमी को पूरा कर सके, न उनके लिए, न उनकी मां के लिए और न ही उनकी बहन के लिए।

आतंकियों ने पहनी थी सेना की वर्दी

निमरत ने खुलासा किया कि उनके पिता के साथ हुई साजिश बहुत ही शातिर थी। जिन लोगों ने मेजर भूपेंद्र सिंह का अपहरण किया, उन्होंने खुद को भारतीय सेना के जवान के रूप में पेश किया था और सेना की वर्दी पहन रखी थी। निमरत ने बताया कि वह एक आम दिन की तरह था, लेकिन ड्यूटी से लौटते समय ही वे जाल में फंस गए। अपहरण के बाद सात दिनों तक आतंकी अपनी मांगें मनवाने के लिए दबाव बनाते रहे। वे भारत में कैद अपने साथियों की रिहाई सहित कई अन्य मांगें रख रहे थे।

कश्मीर से नोएडा तक का कठिन सफर

घटना के समय निमरत का परिवार कश्मीर में ही रह रहा था, लेकिन जब वहां हालात बिगड़ गए और माहौल असुरक्षित हो गया, तो परिवार को श्रीनगर स्थानांतरित कर दिया गया। अपहरण के सातवें दिन ही परिवार को मेजर भूपेंद्र सिंह के निधन की आधिकारिक सूचना मिली। निमरत को पता चला कि बंधक बनाए जाने के दौरान भी उनके पिता ने अपने परिवार का जिक्र किया था और कहा था कि उनका परिवार है और उनकी दो बेटियां हैं। पिता के जाने के बाद निमरत, उनकी बहन और मां नोएडा शिफ्ट हो गईं, जहां उनके नाना-नानी रहते थे और वहां से उन्होंने अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की।

निमरत कौर का आगामी कार्य

निमरत कौर इन दिनों अपने काम को लेकर काफी सक्रिय हैं। वह जल्द ही सेक्शन 84 फिल्म में दिखाई देंगी। यह एक कोर्टरूम ड्रामा है, जिसमें उनके साथ महानायक अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। इस फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है और इसके वर्तमान वर्ष में रिलीज होने के आसार हैं। इसके अलावा, चर्चा है कि वह एक बिना शीर्षक वाली डिटेक्टिव कॉमेडी फिल्म में भी काम कर रही हैं, जिसमें उनके साथ सनी कौशल और मेधा शंकर मुख्य भूमिकाओं में हैं। हाल ही में निमरत कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए भी गई थीं, जिसकी तस्वीरें उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के साथ साझा की थीं।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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