झारखंड
2 घंटे पहले
6
विचारों
स्वर्णरेखा नदी में आई बहार
जमशेदपुर में हुई झमाझम बारिश का असर अब स्वर्णरेखा नदी में साफ दिखाई दे रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी का पूरा नजारा बदल गया है और यह बदलाव स्थानीय मछुआरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रहा है। बारिश के पानी की वजह से नदी में मछलियों की आवक में जबरदस्त उछाल आया है, जिसका सीधा फायदा उन लोगों को मिल रहा है जो अपनी आजीविका के लिए मछली पकड़ने पर निर्भर हैं।
मात्र 2 घंटे में बंपर कैच
नदी किनारे मछली पकड़ने में व्यस्त नीरज और उनके साथी बताते हैं कि जलस्तर बढ़ने से स्थिति काफी अनुकूल हो गई है। नीरज के अनुसार, सामान्य दिनों में घंटों मेहनत करने के बाद भी जो परिणाम नहीं मिलते थे, वह अब मात्र 2 घंटे की मेहनत में हासिल हो रहे हैं। मछलियां इतनी अधिक सक्रिय हैं कि कांटे में बार-बार फंस रही हैं। नीरज का कहना है कि हर 5 मिनट के अंतराल पर एक नई मछली आसानी से जाल में आ रही है। इन पकड़ में मुख्य रूप से रहू, कतला और बाटा जैसी मछलियां शामिल हैं।
सीधे नदी किनारे से खरीद रहे ग्राहक
इस स्थिति का एक बड़ा फायदा ग्राहकों को भी मिल रहा है। अब उन्हें ताजी मछली खरीदने के लिए दूर-दराज के बाजारों में जाने की जद्दोजहद नहीं करनी पड़ रही है। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में स्वर्णरेखा नदी के तट पर पहुंच रहे हैं और मछुआरों से सीधे जिंदा मछली खरीद रहे हैं। बाजार में इन मछलियों की कीमत सामान्यतः 200 रुपये से लेकर 250 रुपये प्रति किलो के बीच चल रही है। चूंकि मछुआरे सीधे नदी किनारे ही बिक्री कर रहे हैं, इसलिए ग्राहकों को ताजी मछली मिल रही है और मछुआरों को बिचौलियों के चक्कर में नहीं पड़ना पड़ रहा है।
कमाई का बढ़ा अवसर
मछुआरों के लिए भारी बारिश का यह दौर आमदनी में बढ़ोतरी लेकर आया है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने उन्हें एक ऐसा मौका दिया है जहां उन्हें अपनी मेहनत का पूरा दाम मिल रहा है। बिना किसी बिचौलिये के सीधे ग्राहकों से जुड़कर वे बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। विशेष रूप से बाटा मछली की मांग यहां काफी देखी जा रही है। यदि आप भी ताजी मछलियों का स्वाद लेना चाहते हैं, तो स्वर्णरेखा नदी के किनारे जाकर अपनी पसंद की मछली सीधे मछुआरों से चुनकर ले सकते हैं। बारिश ने न केवल जलस्तर बढ़ाया है, बल्कि शहर के इस तट को एक जीवंत मछली बाजार के रूप में भी तब्दील कर दिया है।
Comments
0 comment