दिल्ली
एक घंटा पहले
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विचारों
दिल्ली के पार्कों में सुरक्षा का बड़ा सच
दिल्ली के सार्वजनिक पार्कों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत गंभीर रिपोर्ट सामने आई है, जिसने प्रशासन की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी के पार्कों में सुरक्षा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां न केवल सीसीटीवी कैमरों की भारी कमी है, बल्कि कई पार्कों में पुलिस की मौजूदगी और आपातकालीन सुविधाओं का भी घोर अभाव है। दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में हुई एक भयावह घटना के बाद यह ऑडिट कराया गया, जिसके नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली के 190 पार्क ऐसे हैं जहां लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं।
ऑडिट में तीन श्रेणियों में बांटे गए पार्क
उपराज्यपाल के निर्देश पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने शहर के कुल 736 पार्कों का एक विस्तृत सुरक्षा ऑडिट संपन्न किया है। इस ऑडिट का मुख्य उद्देश्य इन स्थानों को सुरक्षित बनाना था। सुरक्षा जोखिम के स्तर के आधार पर इन पार्कों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- हाई रिस्क पार्क: 190 पार्क जिन्हें सबसे असुरक्षित माना गया है।
- मीडियम रिस्क पार्क: 258 पार्क जहां सुरक्षा संबंधी कमियां मौजूद हैं।
- लो रिस्क पार्क: 288 पार्क जहां तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति है।
फिलहाल, सबसे अधिक प्राथमिकता हाई रिस्क श्रेणी वाले पार्कों को दी जा रही है ताकि वहां तुरंत सुधार कार्य पूरे किए जा सकें।
प्रकाश और बुनियादी ढांचे में सुधार की कवायद
सुरक्षा ऑडिट के दौरान रोशनी की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कुल 520 पार्कों में अतिरिक्त लाइटिंग की सख्त आवश्यकता पाई गई है। इस दिशा में कदम उठाते हुए 231 पार्कों में तत्काल प्रभाव से रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। पिछले सप्ताह तक 106 पार्कों में लाइटिंग का काम पूरा भी कर लिया गया है। इसके अलावा, पार्कों के प्रवेश द्वारों को सुरक्षित करने के लिए 163 ऐसे पार्कों की पहचान की गई है जहां बिना लॉक वाले गेट थे। इन्हें अब लॉक वाले मजबूत गेट में बदला जा रहा है।
सीसीटीवी और ग्रिल मरम्मत पर जोर
वर्तमान में स्थिति यह है कि 736 में से केवल 16 DDA पार्कों में सीसीटीवी कैमरे क्रियाशील हैं। इसे देखते हुए ऑडिट में 323 नए पार्कों को सीसीटीवी निगरानी के दायरे में लाने की सिफारिश की गई है। पार्कों की बाउंड्री वॉल और ग्रिल को लेकर भी बड़ी खामियां मिली थीं। लगभग 399 पार्कों में टूटी हुई ग्रिल या बाउंड्री की समस्याएं थीं, जिनमें से 233 पार्कों में मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। साथ ही, सार्वजनिक शौचालयों और सुनसान पड़े ढांचों के आसपास के संवेदनशील इलाकों को भी सुरक्षित किया जा रहा है।
गश्त और मैनपावर की तैनाती
सुरक्षा को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए 245 बड़े पार्कों में रात्रि गश्त की शुरुआत कर दी गई है। हाई रिस्क वाले सभी पार्कों में बाइक के माध्यम से पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि किसी भी अनहोनी को तुरंत रोका जा सके। इतना ही नहीं, 134 पार्कों में गनमैन की तैनाती की आवश्यकता भी महसूस की गई है। सुरक्षाकर्मियों की जवाबदेही तय करने के लिए 602 पार्कों में बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर दी गई है और अन्य पार्कों में भी यह काम जारी है।
पुलिस और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय
स्थानीय पुलिस और सुरक्षाकर्मियों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए एक नई व्यवस्था बनाई गई है। हर पार्क के फील्ड स्टाफ और स्थानीय बीट अधिकारियों के बीच संपर्क की जानकारी साझा कर दी गई है। यह प्रक्रिया अब 100 फीसदी पूरी हो चुकी है। इसके अलावा, एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जा रही है, जो गार्ड की जिम्मेदारी, सुपरवाइजर की जवाबदेही और घटना की रिपोर्टिंग जैसे पहलुओं को कवर करेगी। सुरक्षा टेंडर के नियमों को भी अपडेट किया जा रहा है और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के साथ भी लगातार बैठकें की जा रही हैं ताकि जनता का फीडबैक लिया जा सके।
निगरानी के लिए सेंट्रल मास्टर ट्रैकर
DDA ने इन सुरक्षा कार्यों की नियमित निगरानी के लिए एक 'सेंट्रल मास्टर ट्रैकर' और एक समर्पित मॉनिटरिंग डैशबोर्ड बनाया है। वरिष्ठ अधिकारी स्वयं पार्कों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। हाल ही में 30 सितंबर को प्रिंसिपल कमिश्नर ने यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क का निरीक्षण किया, वहीं 1 अक्टूबर को हॉर्टिकल्चर विभाग के अधिकारियों ने कमला नेहरू रिज पार्क का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस तरह की साप्ताहिक निगरानी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुधार कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें।
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