बुरहानपुर की मशहूर कच्चे केले की टिकिया: जानिए फुला बाई से बनाने का पारंपरिक और आसान तरीका जीवनशैली 2 घंटे पहले 6
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में कच्चे केले की टिकिया काफी लोकप्रिय है, जिसे घर में मौजूद सामान्य सामग्री से बेहद आसानी से तैयार किया जा सकता है। यह बरसात के मौसम का एक खास व्यंजन है जो स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम है।

बुरहानपुर की अनोखी खाद्य परंपरा

मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला न केवल अपने समृद्ध ऐतिहासिक स्मारकों के लिए विश्व भर में विख्यात है, बल्कि यहाँ के पारंपरिक व्यंजन भी लोगों को खूब लुभाते हैं। बुरहानपुर की पाक कला में मौसम के अनुकूल पकवानों का विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक बेहद खास और लोकप्रिय डिश है कच्चे केले की टिकिया। मानसून की दस्तक के साथ ही बुरहानपुर के घरों में इस व्यंजन को बनाने की होड़ सी लग जाती है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है, बल्कि इसे बनाना भी काफी सरल है क्योंकि इसके लिए जरूरी सामग्री हर किसी की रसोई में आसानी से मिल जाती है।

उपवास और स्वाद का मेल

कच्चे केले से तैयार होने वाली यह टिकिया कई लोगों की पहली पसंद है, विशेषकर उन लोगों की जो इसे व्रत या उपवास के दौरान खाना पसंद करते हैं। हालांकि, उपवास में इस्तेमाल किए जाने वाले नमक और अन्य मसालों का चयन पूरी तरह से व्यक्ति की अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित होता है। अपनी सरलता, कम लागत और बेहतरीन स्वाद के कारण, कच्चे केले की टिकिया ने बुरहानपुर की खाद्य संस्कृति में अपनी एक मजबूत और अलग पहचान कायम की है।

विधि और आवश्यक सामग्री

इस व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय विशेषज्ञ फुला बाई ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि टिकिया तैयार करने के लिए मुख्य सामग्री के रूप में कच्चे केले की आवश्यकता होती है। साथ ही इसमें स्वाद के लिए हरा धनिया, जीरा, सूखा धनिया, बारीक कटी हुई हरी मिर्च, नमक और तलने के लिए तेल की जरूरत होती है। सबसे पहले कच्चे केलों को पानी में अच्छी तरह उबाल लिया जाता है। जब केले पूरी तरह उबल जाएं, तो उनके छिलकों को हटा दिया जाता है। इसके बाद उबले हुए केलों को एक बर्तन में डालकर अच्छी तरह मैश कर लिया जाता है ताकि मिश्रण चिकना और एकसार हो जाए।

मिश्रण तैयार करने और सेंकने की कला

मैश किए हुए केलों के मिश्रण में स्वादानुसार नमक, कटी हुई हरी मिर्च, हरा धनिया और जीरा मिलाया जाता है। इन सभी सामग्रियों को हाथों से अच्छी तरह गूंथकर एक समान मिश्रण तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें अपनी हथेली से हल्का दबाकर टिकिया का आकार दिया जाता है। एक कड़ाही या तवे पर थोड़ा तेल गरम करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए, तो तैयार टिकियों को मध्यम या धीमी आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक अच्छी तरह सेंक लें।

लंबे समय तक ताजगी

जब टिकिया पूरी तरह से सुनहरी हो जाए, तो इसे तवे से उतार लिया जाता है। इसे गर्मागर्म चटनी या अपनी पसंद की किसी अन्य चटनी के साथ परोसा जा सकता है। बुरहानपुर के निवासियों के अनुसार, इस व्यंजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे एक बार बनाकर आप कुछ समय के लिए स्टोर भी कर सकते हैं। सामान्य तापमान पर यह टिकिया करीब दो दिनों तक खराब नहीं होती है, जो इसे नाश्ते या सफर के लिए भी एक उत्तम विकल्प बनाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप