पितृ पक्ष 2026: इन वस्तुओं की खरीदारी से बचें, वरना घर की सुख-शांति पर पड़ सकता है बुरा असर धर्म 2 घंटे पहले 2
पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का सम्मान और पूजा करना अनिवार्य है, लेकिन इस दौरान कुछ विशेष चीजों को खरीदने से परहेज करना चाहिए। आइए जानते हैं कि इस अवधि में किन वस्तुओं को घर लाना वर्जित माना गया है।

पितृ पक्ष का महत्व और नियम

27 सितंबर 2026 से पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है। यह विशेष काल पूरी तरह से हमारे पूर्वजों को समर्पित होता है। इन दिनों में अपने पितरों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि जब हम श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं, तो वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। जिन व्यक्तियों पर पितरों की कृपा होती है, उन्हें कभी भी पितृ दोष का सामना नहीं करना पड़ता। इसके विपरीत, यदि पितृ दोष लग जाए, तो व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की बाधाएं और परेशानियां आने लगती हैं। घर का वातावरण भी नकारात्मक हो जाता है और अशांति बनी रहती है। शास्त्रों का स्पष्ट निर्देश है कि पितृ पक्ष के दौरान सादा और सात्विक जीवन शैली अपनानी चाहिए। इस दौरान नई वस्तुओं की खरीदारी करना वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे नकारात्मकता बढ़ सकती है और दोष लगने का भय रहता है।

पितृ पक्ष में किन चीजों की खरीदारी से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 16 दिनों की अवधि के भीतर कुछ वस्तुओं को घर में लाना अशुभ माना गया है:

  • नए वस्त्र: पितृ पक्ष के दौरान नए कपड़े खरीदना वर्जित माना जाता है।
  • आभूषण: सोना, चांदी या किसी भी तरह के कीमती आभूषणों की खरीदारी इस दौरान नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसका नकारात्मक प्रभाव घर की समृद्धि पर पड़ सकता है।
  • झाड़ू: इस समय नई झाड़ू घर में लाने से बचना चाहिए, अन्यथा घर की बरकत प्रभावित हो सकती है।
  • वाहन और संपत्ति: कोई भी नया वाहन खरीदना, नई जमीन लेना, दुकान या नया घर खरीदने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
  • लोहे की वस्तुएं: लोहे से बनी किसी भी सामग्री को खरीदना इस काल में अशुभ माना गया है, इससे जीवन में परेशानियां बढ़ने की आशंका रहती है।
  • नमक और सरसों का तेल: घर में नमक और सरसों के तेल का स्टॉक करने से बचना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से मानसिक शांति भंग हो सकती है।

पितृ पक्ष 2026 और सर्वपितृ अमावस्या

पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को होगा, जिसे सर्वपितृ अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 10 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट पर इसका समापन होगा। अमावस्या का श्राद्ध उन सभी पूर्वजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जिनकी मृत्यु तिथि पूर्णिमा, चतुर्दशी या अमावस्या को हुई थी। जो लोग किसी कारणवश पूरे पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाते, वे केवल इस एक दिन श्राद्ध करके अपने सभी पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध भी इसी दिन करना सर्वोत्तम माना गया है। यही कारण है कि इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप