मंत्र जप नियम: इन मंत्रों का उच्चारण नहीं, बल्कि मानसिक जप है शुभ; गायत्री मंत्र भी शामिल धर्म एक घंटा पहले 6
हिंदू धर्म में कुछ मंत्र ऐसे हैं जिनका मानसिक जप अधिक फलदायी माना गया है। गायत्री, ॐ, शिव, गणेश और महामृत्युंजय मंत्र समेत इन मंत्रों के लाभ और जप से जुड़े नियम जानिए।

हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों और धार्मिक पुस्तकों में अनेक मंत्रों का वर्णन मिलता है। ऐसी मान्यता है कि मंत्रों के नियमित जप से व्यक्ति को सिद्धियां प्राप्त होती हैं और मन को शांति भी मिलती है। आमतौर पर लोग मंत्रों का वाणी से उच्चारण करते हैं, लेकिन कुछ मंत्र ऐसे भी हैं जिनका बोलकर उच्चारण करने के बजाय मन ही मन जप करना अधिक शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ खास मंत्रों के बारे में, जिनका मानसिक जप बेहद फलदायी बताया गया है।

गायत्री मंत्र

  • ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले अधिकांश लोग गायत्री मंत्र का जप करते हैं। माना जाता है कि इसका बोलकर उच्चारण करने के बजाय मन ही मन जप करने से अधिक लाभ मिलता है। गायत्री मंत्र के मानसिक जप से बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है, व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है और वह जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति करता है।

मूल मंत्र

ॐ को सभी मंत्रों का मूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की शुरुआत ॐ की ध्वनि के साथ ही हुई थी। इसका मानसिक जप और उच्चारण, दोनों ही लाभकारी माने गए हैं। इसके जप से आंतरिक अशुद्धियां दूर होती हैं और वाणी में प्रखरता आती है। साथ ही यह मंत्र अलौकिक अनुभव कराने वाला भी माना जाता है।

शिव मंत्र

  • ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय भी सबसे अधिक प्रचलित मंत्रों में से एक है, और इसका भी मानसिक जप करना ही श्रेष्ठ बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र के मानसिक जप से जीवन में स्थिरता आती है और व्यक्ति हर तरह के मानसिक विकारों से मुक्त होता है।

गणेश मंत्र

  • ॐ गं गणपतये नमः।

भगवान गणेश के इस मंत्र का मानसिक जप करने से हर प्रकार की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले यदि इस मंत्र का मन ही मन जप किया जाए तो उस कार्य के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही इस मंत्र का मानसिक जप व्यक्ति को बौद्धिक रूप से भी सशक्त बनाता है।

महामृत्युंजय मंत्र

  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म। उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात्।।

भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए लोग महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हैं। यह मंत्र रोग-दोष से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है और इसके जप से भय से भी छुटकारा मिलता है। हालांकि इस मंत्र का जप भी मानसिक रूप से ही करना चाहिए, तभी इसके श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त होते हैं।

ग्रहों के बीज मंत्र

ज्योतिष में 9 ग्रहों का उल्लेख मिलता है और हर ग्रह का अपना अलग बीज मंत्र होता है। इन बीज मंत्रों का भी गुप्त रूप से और मन ही मन जप करना चाहिए। ग्रहों के बीज मंत्रों का जप करने से संबंधित ग्रह के शुभ फल व्यक्ति को मिलने लगते हैं।

मंत्र जप से जुड़े इन नियमों का भी रखें ध्यान

  • किसी मंत्र को सिद्ध करने के लिए उसे प्रतिदिन निश्चित समय पर और 11, 21, 108 आदि निश्चित संख्या में जपें।
  • मंत्र जप के लिए किसी मंदिर में जाएं या घर में किसी एकांत स्थान का चुनाव करें।
  • मंत्र जप करते समय कभी भी आंखें न खोलें।
  • मंत्र जप वाले स्थान को हमेशा स्वच्छ बनाए रखें।
  • यदि किसी मंत्र को सिद्ध करना चाहते हैं या किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए जप कर रहे हैं, तो इसके बारे में गलती से भी किसी को न बताएं।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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