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एक घंटा पहले
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Adhik Maas: आज, यानी 15 जून 2026 को अधिक मास का समापन हो गया, जिसे मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। पूजा-पाठ, जप-तप और साधना के लिहाज से यह माह बेहद पुण्यदायी माना जाता है, लेकिन शादी-विवाह, सगाई और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों के लिए इसे शुभ नहीं समझा जाता। इस वर्ष अधिक मास ज्येष्ठ माह में पड़ा था, जिसके चलते इस बार ज्येष्ठ के दो महीने—अधिक ज्येष्ठ और शुद्ध ज्येष्ठ—आए। आज सोमवती अमावस्या के पावन संयोग के साथ यह आध्यात्मिक और पवित्र माह समाप्त हुआ है। अधिक मास के बीतते ही अब फिर से सभी शुभ और मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे।
अगला अधिक मास किस वर्ष और महीने में पड़ेगा?
अधिक मास भगवान विष्णु को प्रिय महीनों में गिना जाता है और विष्णु जी की आराधना के लिए इसे अत्यंत उत्तम माना गया है। उल्लेखनीय है कि यह माह हर 3 साल में एक बार आता है, इसलिए इस पुण्यकारी महीने के लिए श्रद्धालुओं को अब तीन वर्ष की प्रतीक्षा करनी होगी। अगला अधिक मास यानी मलमास साल 2029 में चैत्र माह में लगेगा और इसकी अवधि 16 मार्च 2029 से 13 अप्रैल 2029 तक रहेगी। जिस वर्ष अधिक मास पड़ता है, उस साल कैलेंडर में एक महीना अतिरिक्त जुड़ जाता है। गौरतलब है कि इस बार मलमास का आरंभ 17 मई से हुआ था, जिसका समापन 15 जून 2026 को हुआ।
मलमास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अन्य महीनों की तरह अधिक मास का कोई स्वामी नहीं था, इसी कारण इस माह को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना गया। मलमास की इस पीड़ा को देखकर भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम 'पुरुषोत्तम' प्रदान किया।
'अहमेते यथा लोके प्रथितः पुरुषोत्तमः। तथायमपि लोकेषु प्रथितः पुरुषोत्तमः।।'
अर्थात्, जिस प्रकार मैं इस लोक में 'पुरुषोत्तम' नाम से प्रसिद्ध हूं, उसी प्रकार यह मलमास भी संसार में 'पुरुषोत्तम' के नाम से विख्यात होगा। यह माह शेष सभी महीनों का अधिकारी होगा और इसे पूरे विश्व में पवित्र माना जाएगा।
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