उत्तराखंड
एक घंटा पहले
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होमस्टे के नियमों में बड़े बदलाव
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में संचालित होमस्टे योजना को लेकर नई नियमावली लागू कर दी है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य योजना का लाभ वास्तविक स्थानीय निवासियों तक पहुंचाना और इसके दुरुपयोग को रोकना है। अब होमस्टे का पंजीकरण कराना पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो गया है।
नई शर्तें और सीमाएं
संशोधित नियमों के अनुसार, अब होमस्टे खोलने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी:
- कमरों की संख्या: होमस्टे में कम से कम 5 और अधिकतम 8 कमरे होने चाहिए।
- बेड की सीमा: कुल बेड की संख्या 24 से अधिक नहीं हो सकती है।
- स्थान की बाध्यता: होमस्टे का पंजीकरण केवल ग्रामीण क्षेत्रों और नगर पंचायत क्षेत्रों में ही किया जा सकेगा।
- स्वामी का निवास: यह शर्त सबसे महत्वपूर्ण है कि मकान मालिक या उसका परिवार उसी आवासीय भवन में स्थायी रूप से निवास करता हो।
इसका सीधा अर्थ यह है कि अब केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासी ही होमस्टे के जरिए पर्यटकों को ठहराने और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराकर योजना का लाभ ले पाएंगे।
योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2015 में ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने, पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए होमस्टे योजना की शुरुआत की थी। वर्ष 2018 में इसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना के साथ जोड़कर सब्सिडी और व्यावसायिक शुल्क में राहत जैसी सुविधाएं दी गईं। वर्तमान में प्रदेश में 5 हजार से अधिक पंजीकृत होमस्टे चल रहे हैं, लेकिन नियमों के गलत इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
पर्यटन इकाइयों का दायरा बढ़ा
नैनीताल के जिला पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी ने बताया कि संशोधित नियमावली में पर्यटन इकाइयों के दायरे को और विस्तृत किया गया है। अब इनमें होटल, मोटल, रिजॉर्ट, टेंट कॉलोनी, नेचर कैंप, बेड एंड ब्रेकफास्ट, हेरिटेज होटल, सर्विस अपार्टमेंट, पर्यटक ग्राम, योग एवं आयुर्वेद रिसॉर्ट, धर्मशाला, हाउस बोट और सामुदायिक आधारित पर्यटन इकाइयों को भी शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से होमस्टे संचालन में पारदर्शिता आएगी और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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