पृथ्वी तो हर पल घूम रही है, फिर भूकंप आते ही क्यों मच जाती है तबाही? जानिए इसके पीछे का विज्ञान विश्व एक घंटा पहले 2
भूकंप की घटनाओं को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि लगातार घूमती पृथ्वी पर अचानक झटके क्यों महसूस होते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के भूगोल विशेषज्ञ ने इस प्रक्रिया और इसके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को विस्तार से समझाया है।

पृथ्वी का घूमना और भूकंप का संबंध

पृथ्वी अपनी धुरी पर लगातार घूम रही है, फिर भी हमें इसका एहसास इसलिए नहीं होता क्योंकि हम खुद भी इसके साथ ही गति कर रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर सलीम मीर इसे एक विमान के उदाहरण से समझाते हैं। जैसे एक उड़ते हुए विमान के अंदर बैठे यात्री को विमान की गति महसूस नहीं होती, उसी तरह पृथ्वी के घूमने के दौरान भी हम एक स्थिर स्थिति में होते हैं। हालांकि, जब पृथ्वी की गति में कोई बाहरी व्यवधान आता है या इसकी ऊपरी सतह में हलचल होती है, तो हमें झटकों का अनुभव होता है, जिसे हम भूकंप कहते हैं।

भूकंप क्यों आते हैं?

डॉक्टर मीर के अनुसार, हमारी पृथ्वी की ऊपरी सतह, जिसे क्रस्ट कहा जाता है, लगभग 15 से 20 किलोमीटर मोटी है। यह सतह कई बड़ी टेक्टोनिक या कॉन्टिनेंटल प्लेटों (जैसे एशियन, यूरोपियन और ऑस्ट्रेलियन प्लेट) में विभाजित है। ये प्लेटें पृथ्वी के भीतर मौजूद तरल मेंटल वाली परत पर तैरती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या इनमें रगड़ पैदा होती है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा बाहर निकलती है। यही ऊर्जा भूकंप के रूप में धरती पर तबाही का कारण बनती है। इसके अलावा ज्वालामुखी विस्फोट, खनन या अन्य बड़े विस्फोट भी भूकंप का कारण बन सकते हैं।

रिक्टर स्केल और तबाही का गणित

भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर 1 से 10 तक मापा जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रिक्टर स्केल पर एक अंक की बढ़ोतरी का मतलब सामान्य वृद्धि नहीं है। उदाहरण के लिए, 6 मैग्नीट्यूड का भूकंप 5 मैग्नीट्यूड की तुलना में 10 गुना अधिक विनाशकारी होता है। तबाही का स्तर उस क्षेत्र के निर्माण और बुनियादी ढांचे पर भी निर्भर करता है। जापान जैसे देशों में भूकंपरोधी इमारतों के कारण उच्च तीव्रता के झटके भी सहन कर लिए जाते हैं, जबकि कमजोर निर्माण वाले इलाकों में 4 मैग्नीट्यूड का भूकंप भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

बचाव के प्रमुख उपाय

भूकंप के झटके महसूस होने पर निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • झटके महसूस होते ही तुरंत इमारत से बाहर किसी खुले स्थान पर निकल जाएं।
  • ऊंची इमारतों में होने पर लिफ्ट या एस्केलेटर का उपयोग बिल्कुल न करें।
  • यदि बाहर निकलना संभव न हो, तो किसी मजबूत मेज या बेंच के नीचे छिप जाएं ताकि गिरते मलबे से बचा जा सके।
  • शीशे, खिड़कियों और भारी सामानों से दूर रहें।
  • खुले मैदान में किसी पेड़ या बिजली के खंभे को पकड़कर स्थिर खड़े रहने का प्रयास करें, दौड़ने से बचें।
साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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