NATO सहयोगियों पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, ईरान युद्ध में समर्थन नहीं मिलने पर जताई नाराजगी विश्व एक घंटा पहले 2
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दौरान NATO देशों से वफादारी नहीं मिलने का आरोप लगाया है। वहीं, NATO प्रमुख मार्क रुटे ने आंकड़ों के साथ ट्रंप के दावों का खंडन किया है।

ट्रंप की नाराजगी और NATO की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान NATO सहयोगियों की भूमिका पर कड़ा असंतोष जाहिर किया है। व्हाइट हाउस में NATO महासचिव मार्क रुटे के साथ हुई बैठक में ट्रंप ने आरोप लगाया कि अमेरिका को अपने सहयोगी देशों से अपेक्षित समर्थन और वफादारी नहीं मिली। ट्रंप का कहना था कि ईरान को पहले ही हफ्ते में पूरी तरह तबाह कर दिया गया था, लेकिन इस दौरान सहयोगी देशों का रुख निराशाजनक रहा। जब उनसे पूछा गया कि क्या यूरोपीय देशों ने अमेरिका का साथ दिया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।

मार्क रुटे ने गिनाए अमेरिकी सैन्य विमान

ट्रंप के आरोपों का जवाब देते हुए NATO प्रमुख मार्क रुटे ने बचाव में ठोस तर्क पेश किए। उन्होंने बताया कि ईरान के खिलाफ 6 सप्ताह तक चले युद्ध के दौरान यूरोप में स्थित सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिका ने बखूबी किया। मार्क रुटे ने जानकारी दी कि इस अवधि के दौरान यूरोप से 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी थी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान रोमानिया के बुखारेस्ट एयरपोर्ट को भी सामान्य उड़ानों के लिए बंद करना पड़ा, ताकि अमेरिकी विमानों की आवाजाही में कोई बाधा न आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोपीय सहयोगी अमेरिका के साथ मजबूती से खड़े थे।

स्पेन से लेकर जर्मनी तक पर बरसे ट्रंप

ट्रंप ने बैठक में कई देशों का नाम लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पेन को पूरी तरह निराशाजनक करार दिया और इटली, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। ट्रंप का आरोप है कि ये देश रक्षा खर्च के बजाय अमेरिका पर निर्भर रहना चाहते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केवल जर्मनी में ही लगभग 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, इसके बावजूद उन्हें बदले में वफादारी नहीं मिली। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें पैसे से अधिक अमेरिका के प्रति सहयोगियों की निष्ठा की आवश्यकता है।

रक्षा खर्च पर भी छिड़ी बहस

बैठक के दौरान मार्क रुटे ने ट्रंप के प्रभाव का जिक्र करते हुए बताया कि उनके दबाव के कारण यूरोप और कनाडा ने अपने रक्षा बजट में लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि की है। इस निवेश से अमेरिकी रक्षा कंपनियों को भी बड़े ऑर्डर मिले हैं। हालांकि, ट्रंप ने फिर दोहराया कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है और वे चाहते हैं कि उनके सहयोगी भी जिम्मेदारी साझा करें।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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