यमन में विदेशी पुरुषों से शादी का नया ट्रेंड: लड़कियों के लिए आर्थिक आजादी या बर्बादी का रास्ता? विश्व 2 महीने पहले 78
युद्धग्रस्त यमन में गरीबी और बदहाली से बचने के लिए युवतियां अमीर विदेशी पुरुषों से शादी को अपना सहारा मान रही हैं। हालांकि, कई मामलों में यह फैसला खुशहाली के बजाय नई मुसीबतों का सबब बन रहा है।

युद्ध और गरीबी के बीच बदलती प्राथमिकताएं

करीब एक दशक से गृहयुद्ध और गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे यमन में अब एक नया सामाजिक चलन तेजी से पनप रहा है। यहां की युवा महिलाएं देश की बदहाली से बाहर निकलने के लिए अमीर विदेशी पुरुषों से शादी करना एक बेहतर विकल्प मान रही हैं। कई युवतियां इसे एक सुरक्षित भविष्य और आर्थिक आजादी के गेटवे के तौर पर देख रही हैं।

सपना पूरा हुआ या धोखा मिला

मिडिल ईस्ट आई की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 29 साल की मोना की कहानी एक सफल उदाहरण मानी जा सकती है। यमन में अत्यधिक गरीबी के कारण अपने पहले पति से तलाक लेने के बाद, उन्होंने एक अमीर अमीराती नागरिक से विवाह किया। हालांकि यह रिश्ता गुप्त रखा गया, लेकिन आज मोना मिस्र में रह रही हैं और उनके पति उनके साथ-साथ उनके परिवार की भी आर्थिक मदद कर रहे हैं। उन्हें शादी के दौरान 10 हजार डॉलर का मेहर मिला था।

दुखद हकीकत और धोखे की दास्तां

हर कहानी का अंत मोना की तरह सुखद नहीं होता। 22 साल की नोहा ने भी अमेरिकी पासपोर्ट धारी एक विदेशी से मिस्र में शादी की थी, लेकिन जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि उनके पति उन्हें एक इंसान नहीं बल्कि एक वस्तु की तरह देखते हैं। नोहा का आरोप है कि उनका पति समय-समय पर लड़कियों से शादी करके उन्हें तलाक दे देता है। बाद में उनके पिता ने उन्हें वापस यमन लाकर सुरक्षित किया। अब नोहा अन्य लड़कियों को इस तरह के रिश्तों से सावधान रहने की सलाह देती हैं।

सामाजिक विशेषज्ञों की चिंता

समाजशास्त्री नईफ नूरुद्दीन के मुताबिक, ऐसी शादियों के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्थिक तंगी है। अधिकांश लड़कियां गरीब या बिखरे हुए परिवारों से आती हैं। नूरुद्दीन ने चेतावनी दी कि कई विदेशी पुरुष इन महिलाओं से अस्थायी शादी करते हैं और कुछ समय बाद उन्हें छोड़कर चले जाते हैं। इससे महिलाओं को न केवल भावनात्मक आघात पहुंचता है, बल्कि समाज में उन्हें कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय विवाह के प्रति जागरूकता फैलाना जरूरी है ताकि महिलाएं केवल आर्थिक मजबूरी में आकर खुद को खतरे में न डालें।

सुरक्षित भविष्य की तलाश

20 साल की मरियम का मानना है कि यमन में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बहुत अधिक है। मरियम कहती हैं कि अगर उन्हें कोई सक्षम जीवनसाथी मिलता है, चाहे वह यमनी हो या विदेशी, तो वह देश से बाहर जाकर बसने के लिए तैयार हैं। उनका तर्क है कि पुरुषों की तरह महिलाओं को भी बेहतर जीवन जीने का पूरा अधिकार है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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