धर्म
16 घंटे पहले
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विचारों
नगर सेठ बंशीवाला मंदिर की अनूठी परंपरा
नागौर में स्थित नगर सेठ श्री बंशीवाला मंदिर इन दिनों अपने वार्षिक झूलोत्सव के चलते चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दूर-दराज से आने वाले भक्त इस विशेष आयोजन में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण यहां का करीब 800 साल पुराना स्वर्णमंडित झूला है। इस प्राचीन झूले की खासियत यह है कि इतने लंबे समय के बावजूद इसे आज तक किसी भी प्रकार की मरम्मत की आवश्यकता नहीं पड़ी है।
सुरक्षित तिजोरी में रखा जाता है झूला
मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह स्वर्ण झूला साल के बाकी दिनों में एक बेहद सुरक्षित तिजोरी के भीतर रखा जाता है। इसे केवल साल में एक बार वार्षिक झूलोत्सव के दौरान ही बाहर निकाला जाता है। इस झूले की बनावट इतनी जटिल और भव्य है कि इसे जोड़ने की प्रक्रिया में भी काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। इसे पूरी तरह से तैयार करने के लिए 100 से अधिक हिस्सों को आपस में जोड़ा जाता है, जिसमें लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता है।
धार्मिक महत्व और मान्यताएं
इस पवित्र मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा जी और रुक्मिणी जी की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक प्राचीन मान्यता भी काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले यहां एक गाय स्वयं ही दूध की धारा बहाया करती थी, जिसके बाद उसी स्थान से शिवलिंग प्रकट हुआ था। इसी चमत्कारिक घटना के बाद वहां पातालेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की गई थी, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
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