बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
सपनों के लिए छोड़ी आकर्षक नौकरी
मुजफ्फरपुर के अतरदह के रहने वाले रोहित रंजन ने साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, तो बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने एक प्रतिष्ठित कंपनी में सालाना 18 लाख रुपये का पैकेज मिलने के बावजूद उसे छोड़ने का साहसी निर्णय लिया। उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करने का था। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद जब उन्हें अच्छी नौकरी मिली, तो भी उनका मन सिविल सेवा की ओर ही लगा रहा। नौकरी के करीब एक साल बाद उन्होंने अपना करियर बदलने का बड़ा फैसला लिया और पूरी तरह से परीक्षा की तैयारी में जुट गए।
दूसरे प्रयास में मिली बड़ी कामयाबी
रोहित के लिए यह राह आसान नहीं थी। बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम में उन्होंने 189वीं रैंक हासिल की है। रोहित बताते हैं कि पहले प्रयास में सफलता न मिलने पर उन्हें अपने निर्णय पर थोड़ा संदेह हुआ था, लेकिन परिवार के निरंतर सहयोग और प्रेरणा ने उन्हें टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और दूसरे प्रयास में दोगुनी मेहनत के साथ मैदान में उतरे, जिसका परिणाम उन्हें एसडीएम के पद के रूप में मिला है।
पिता का अधूरा सपना हुआ पूरा
रोहित की सफलता ने उनके परिवार को गौरवान्वित कर दिया है। उनके पिता प्रमोद प्रसाद गुप्ता, जो एक किराना दुकान चलाते हैं, अपने बेटे की उपलब्धि से बेहद भावुक हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं की आर्थिक स्थितियों के कारण वे अपनी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ा पाए थे, लेकिन उनके बेटे ने उनके वर्षों पुराने अधिकारी बनने के सपने को साकार कर दिया है। शनिवार शाम परिणाम घोषित होते ही रोहित के मुजफ्फरपुर स्थित आवास पर जश्न का माहौल छा गया और स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
रोहित रंजन की यह यात्रा उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो सुरक्षित करियर छोड़कर अपने सपनों को सच करना चाहते हैं। उनकी कहानी यह स्पष्ट करती है कि प्रशासनिक सेवा में आने का संकल्प और उसे पाने के लिए की गई कड़ी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गई है।
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