मानसून में भिंडी की खेती से बंपर कमाई, कम लागत में लाखों का मुनाफा कमा रहे किसान छत्तीसगढ़ 2 महीने पहले 71
बरसात के मौसम में भिंडी की खेती किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। बस्तर के किसान सुखदास ने ढाई एकड़ में खेती कर करीब 2.5 लाख रुपये की कमाई का लक्ष्य रखा है।

मानसून के दौरान भिंडी की खेती बनी मुनाफे का जरिया

बरसात का मौसम कृषि क्षेत्र के लिए नई उम्मीदें लेकर आता है। इस समय कई ऐसी सब्जियां हैं जिनकी खेती करना किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला साबित होता है। बस्तर के रहने वाले प्रगतिशील किसान सुखदास का उदाहरण इस बात का प्रमाण है। उन्होंने अपनी जमीन पर भिंडी की खेती शुरू की है, जो इस सीजन में उन्हें मालामाल बना रही है। भिंडी की मांग मानसून में काफी बढ़ जाती है, जिससे बाजार में इसका भाव भी अच्छा मिलता है।

ढाई एकड़ में ढाई लाख का लक्ष्य

सुखदास ने करीब ढाई एकड़ भूमि पर सामान्य तरीके से भिंडी की फसल लगाई है। उनकी गणना के अनुसार, इस पूरी खेती में उनकी कुल लागत लगभग 25 हजार रुपये आई है। उचित देखभाल और सही प्रबंधन की बदौलत उन्होंने इस सीजन में कम से कम ढाई लाख रुपये तक की कमाई का लक्ष्य रखा है। भिंडी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है। यदि किसान सही ढंग से इसकी देखभाल करें, तो बुवाई के महज 35 दिन के भीतर ही फसल उत्पादन देना शुरू कर देती है।

खेती की प्रक्रिया और देखभाल

सुखदास मौर्य ने अपनी सफलता का राज साझा करते हुए बताया कि खेत की तैयारी में उन्होंने पहले दो बार हल चलवाया और उसके बाद एक बार रोटावेटर का उपयोग किया। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से क्यारियां तैयार की गईं। पौधों के बीच की दूरी का ध्यान रखते हुए उन्होंने प्रत्येक पौधे के बीच एक फीट की चौड़ाई और पौधों के बीच चार से पांच इंच का अंतर रखा है। इस खेती में उन्होंने मुख्य रूप से वियेनार किस्म की भिंडी को चुना है। फसल को पोषण देने के लिए उन्होंने गोबर की खाद के साथ-साथ DAP, यूरिया, पोटाश और 19:19:19 जैसे उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया है।

रोगों से बचाव और अन्य विकल्प

भिंडी की फसल में अन्य सब्जियों की तुलना में बीमारियों का प्रकोप कम देखा जाता है। हालांकि, कभी-कभी तना छेदक जैसी समस्याएं आ सकती हैं, जिसके उपचार के लिए किसान 12 ज्वाइंट का छिड़काव करते हैं। यह फसल लगभग चार महीने तक चलती है, जिससे किसान लंबे समय तक लगातार आमदनी प्राप्त करते रहते हैं। सुखदास केवल भिंडी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने खेत में टमाटर, बैगन और खीरा जैसी अन्य सब्जियां भी उगाते हैं, जिससे उन्हें हर साल लाखों की कमाई होती है। उनकी यह मेहनत आज अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है कि कैसे सीमित संसाधनों में बेहतर प्रबंधन करके कृषि को लाभकारी बनाया जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप