मानसून में पशुओं की देखभाल: थोड़ी-सी चूक से बीमार पड़ सकते हैं मवेशी, अपनाएं ये जरूरी उपाय राजस्थान 4 महीने पहले 69
बरसात के मौसम में नमी और गंदगी से गाय, भैंस और बकरियों में थनैला, गलघोंटू, खुरपका-मुंहपका और फुट रोट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साफ-सूखा आवास, स्वच्छ चारा-पानी, समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवा से पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है।

मानसून भले ही खेती-किसानी के लिए राहत और खुशहाली लेकर आता हो, लेकिन पशुपालकों के सामने यह मौसम कई मुश्किलें खड़ी कर देता है। लगातार बारिश से बाड़ों में बढ़ती नमी, कीचड़ और गंदगी बैक्टीरिया और फंगस जैसे हानिकारक सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए माकूल माहौल बना देती है। यही वजह है कि इस दौरान पशुओं में गंभीर संक्रामक रोगों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

किन बीमारियों का रहता है खतरा

पशु चिकित्सकों का कहना है कि बरसात के मौसम में गाय, भैंस, बकरी समेत अन्य मवेशियों को विशेष देखरेख की जरूरत होती है। समय पर सावधानी न बरती जाए तो पशु आसानी से संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। नमी और गंदगी के चलते इस मौसम में त्वचा रोग, फंगल संक्रमण, निमोनिया, खुरों में सड़न (फुट रोट), दस्त और बुखार जैसी दिक्कतें बेहद आम हो जाती हैं।

इसके साथ ही गलघोंटू, खुरपका-मुंहपका (FMD), लंगड़ी बुखार, थनैला और परजीवी संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। इस दौरान पशुओं के पेट में कीड़े होने की समस्या आम है, जो न सिर्फ उनकी सेहत कमजोर करती है, बल्कि दूध उत्पादन पर भी बुरा असर डालती है।

सूखा और साफ आवास सबसे जरूरी

पशुओं को हमेशा सूखी और साफ जगह पर रखना बेहद आवश्यक है। पशुशाला में पानी जमा नहीं होना चाहिए और वहां जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है। गीली मिट्टी और कीचड़ में लंबे समय तक रहने से पशुओं के खुर खराब हो सकते हैं और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

चारा और पानी का रखें ध्यान

पशुपालकों को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि मवेशियों को कभी भी गीला, सड़ा या खराब चारा न दिया जाए। उन्हें हमेशा साफ और सूखा चारा दें तथा पीने के लिए स्वच्छ जल का प्रबंध करें। संक्रमण से बचाव के लिए पशुओं के खुरों की नियमित सफाई भी बहुत जरूरी है।

कीटों से बचाव के उपाय

बारिश के मौसम में मच्छरों और दूसरे कीटों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, इसलिए पशुशाला के आसपास पूरी स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य है। कीटों से बचने के लिए नीम के धुएं का इस्तेमाल करें या जरूरत के मुताबिक कीटनाशकों का छिड़काव करें। मच्छरों के काटने से बचाने के लिए पशुओं पर मच्छरदानी का उपयोग करना या जाली लगवाना भी बेहद कारगर तरीका है।

समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवा

पशु चिकित्सकों ने सलाह दी है कि मानसून शुरू होने से पहले ही पशुओं का आवश्यक टीकाकरण करा लें। साथ ही समय-समय पर कृमिनाशक (डीवर्मिंग) दवा देकर पेट के कीड़ों की रोकथाम करना भी जरूरी है। उचित देखभाल, साफ-सफाई और समय पर इलाज अपनाकर मानसून के दौरान पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और बीमारियों से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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