बिजनेस आइडिया: महज 556 रुपये में शुरू करें मुर्गी पालन, सरकार दे रही 75% अनुदान, होगी जबरदस्त कमाई! व्यापार एक महीने पहले 19
बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना के तहत किसान सिर्फ 556 रुपये लगाकर मुर्गी पालन शुरू कर सकते हैं, जबकि बाकी रकम सरकार अनुदान के रूप में देती है। योजना में लाभार्थियों को 40 उन्नत नस्ल के चूजे और मुफ्त टीकाकरण की सुविधा मिलती है।

ग्रामीण इलाकों में किसान अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आमदनी के अतिरिक्त साधन के रूप में कुक्कुट पालन की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। कम लागत और सरकारी मदद की वजह से बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना गांव-देहात में लगातार लोकप्रिय हो रही है। इस योजना के सहारे किसान बहुत मामूली निवेश में मुर्गी पालन की शुरुआत करके अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं।

कितनी है लागत और कितना देती है सरकार

पशुपालन विभाग द्वारा चलाई जा रही इस बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना की कुल लागत 2,225 रुपये तय की गई है। इसमें लाभार्थी को अपनी ओर से सिर्फ 556 रुपये खर्च करने होते हैं, जबकि बची हुई 1,669 रुपये की राशि सरकार अनुदान के तौर पर वहन करती है। यानी बेहद सीमित पूंजी में किसान इस व्यवसाय की नींव रख सकते हैं।

योजना का मकसद

इस योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण परिवारों की आमदनी में इजाफा करना, पशुधन पर आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाना और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। कम खर्च में चलने वाला यह मॉडल खासकर गांवों में रोजगार का बेहतर जरिया साबित हो रहा है।

लाभार्थियों को क्या-क्या मिलता है

योजना के अंतर्गत हर लाभार्थी को 28 दिन के 40 उन्नत नस्ल के चूजे उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके साथ ही जरूरी दवाएं और टीकाकरण भी पूरी तरह मुफ्त मुहैया कराया जाता है। एक बड़ी सुविधा यह है कि इन चूजों के पालन-पोषण पर ज्यादा खर्च नहीं आता।

क्यों मानी जा रही सफल पहल

एक पशु चिकित्सक के अनुसार, कम लागत और मुफ्त चिकित्सा सहायता की वजह से यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में काफी कारगर साबित हो रही है। मामूली निवेश पर शुरू होने वाला यह व्यवसाय किसानों के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा विकल्प बन गया है, यही कारण है कि इसे एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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