उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
निजीकरण की प्रक्रिया के तहत एक और कदम बढ़ाते हुए सरकार ने रजिस्ट्री विभाग को भी निजी हाथों में सौंपने का फैसला कर लिया है। इस निर्णय की जानकारी मिलते ही विभाग से जुड़े कर्मचारी आक्रोशित हो उठे और उन्होंने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया।
विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं के निजीकरण के बाद अब सरकार की ओर से रजिस्ट्री विभाग को भी निजीकरण के दायरे में लाया जा रहा है। जैसे ही इसकी सूचना विभाग के कर्मचारियों तक पहुंची, वे रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह धरना समाप्त नहीं होगा।
निजीकरण के फैसले का विरोध
धरने पर बैठे मंजूर रसद ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सरकार रजिस्ट्री विभाग से जुड़े वकील, टाइपराइटर, मुंशी समेत अन्य कर्मचारियों को हटाकर निजीकरण कर रही है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि एक मोहल्ले के स्तर पर करीब 10 लोग लंबे समय से रजिस्ट्री कार्यालय से जुड़कर काम करते आ रहे हैं और इन्हीं 10 लोगों के परिवारों की आजीविका इसी पर टिकी है। उनका कहना है कि निजीकरण होने से ये सभी बेरोजगार हो जाएंगे और उनके सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। यही वजह है कि सभी कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं और जब तक सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती, उनका विरोध चलता रहेगा।
मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन धरना
शाकीर जमाल ने बताया कि सरकार ऐसी नीति बना रही है जिसके तहत सब रजिस्ट्रार से जुड़े सभी कार्यों का निजीकरण कर दिया जाए, जिससे अनेक दिक्कतें पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि लेखक के साथ-साथ अन्य कर्मचारी भी हैं जो अब तक अपना काम कर रहे थे, लेकिन निजीकरण होते ही उनका काम खत्म हो जाएगा और सभी बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने सरकार से अपने फैसले पर दोबारा विचार कर आदेश वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि जब तक आदेश वापस नहीं लिया जाता, धरना-प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा।
भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका
एजाज अहमद और नसीम अहमद समेत अन्य कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि निजीकरण से कर्मचारियों के हितों पर बुरा असर पड़ेगा और आम जनता को भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा। कर्मचारियों का कहना है कि रजिस्ट्री विभाग लंबे समय से जनता को पारदर्शी और सुचारु सेवाएं देता आ रहा है, लेकिन निजीकरण लागू होने से विभागीय व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी एजेंसियों को काम सौंपे जाने से भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका है और आम लोगों को अधिक शुल्क चुकाना पड़ सकता है।
फैसला वापस लेने और स्थायी नियुक्तियों की मांग
कर्मचारियों ने मांग की कि सरकार निजीकरण का निर्णय वापस ले और विभाग को मजबूत बनाने के लिए स्थायी नियुक्तियां करे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने सब रजिस्ट्रार प्रहलाद कुमार सरोज के माध्यम से शासन को ज्ञापन भी भेजा, जिसमें निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
कर्मचारियों ने कहा कि वे अपने अधिकारों और विभाग के अस्तित्व की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करते रहेंगे। इस मौके पर कमाल, हरिराम, राम सिंगर, खालिद समेत कई लोग मौजूद रहे।
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