उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश के मथुरा की छाता तहसील से सामने आया एक मामला तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि बिलौटी गांव में NH-19 के किनारे जिस जमीन को प्रशासन ने एनएचएआई की भूमि बताकर बुलडोजर चलवाकर खाली कराया था, आज उसी जमीन पर एक निजी व्यक्ति की बाउंड्रीवाल खड़ी नजर आ रही है।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित परिवार का कहना है कि कार्रवाई के दौरान उन्हें न तो कोई उचित नोटिस दिया गया और न ही अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला। प्रशासन ने जमीन को एनएचएआई की संपत्ति बताते हुए ध्वस्तीकरण कर कब्जा हटवा दिया। मगर कहानी यहीं नहीं रुकी। पीड़ित के मुताबिक कार्रवाई के कुछ ही दिनों के भीतर उसी जमीन पर बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू हो गया।
उठ रहे कई सवाल
अब लोगों के मन में सवाल यह है कि अगर जमीन सचमुच एनएचएआई की थी, तो उस पर निजी निर्माण कैसे हो गया। क्या यह दीवार एनएचएआई ने बनवाई, या किसी सरकारी विभाग ने वहां निर्माण कराया, या फिर किसी निजी व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया। इन सवालों का जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
सबसे दिलचस्प स्थिति तब बनी जब निर्माण करा रहे व्यक्ति से इस बारे में पूछा गया। आरोप है कि उसने खुद कोई जवाब देने के बजाय केवल इतना कहा कि तहसीलदार साहब से बात कर लीजिए। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब जमीन पर निर्माण किसी और का है, तो जवाब के लिए तहसीलदार का नाम क्यों आगे किया जा रहा है।
पीड़ितों का आरोप
पीड़ित कन्हैया दास और कुंवर सिंह ने बताया कि यह जमीन उनकी है और दान में मिली थी। उनके अनुसार नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने जिस जमीन का अधिग्रहण किया था वह अलग है, जबकि यह निजी और दान की जमीन है।
अधिकारियों ने पैसे लेकर एक कॉलोनाइजर से जमीन पर अवैध कब्जा करवाया है। राजेश महेश्वरी नाम के बड़े पूंजीपति ने पैसे के दम पर हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है।
प्रशासन का पक्ष नहीं मिला
इस पूरे प्रकरण में जब तहसीलदार का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका, जिससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। ग्रामीणों और पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर जमीन सरकारी थी तो उस पर निजी बाउंड्रीवाल कैसे खड़ी हो गई, और यदि निर्माण वैध है तो प्रशासन सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा।
न्याय और जांच की मांग
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित परिवार न्याय और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि एनएचएआई के नाम पर जमीन खाली कराकर कहीं किसी और को फायदा तो नहीं पहुंचाया गया, या इसके पीछे कोई और सच्चाई है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं, क्योंकि जनता इन सवालों के जवाब चाहती है।
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