हिमाचल की रहस्यमयी कमरूनाग झील फिर खजाने से लबालब, 11 हजार फीट पर सदियों पुरानी परंपरा जारी हिमाचल प्रदेश 5 घंटे पहले 8
मंडी जिले में 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित देव कमरूनाग की झील आषाढ़ संक्रांति के सरनाहुली मेले में एक बार फिर सोना, चांदी और नकदी से भर गई। मन्नतें पूरी होने पर लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार झील में दान अर्पित करते हैं।

मंडी जिले में 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल देव कमरूनाग की रहस्यमयी झील एक बार फिर खजाने से भर उठी है। आषाढ़ संक्रांति के मौके पर चल रहे मेले के दौरान श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर यहां दिल खोलकर दान किया।

सरनाहुली मेला और श्रद्धालुओं का जनसैलाब

देव कमरूनाग में हर साल आषाढ़ संक्रांति पर वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है, जिसे सरनाहुली मेला कहा जाता है। इस अवसर पर केवल प्रदेश से ही नहीं, बल्कि समूचे उत्तरी भारत से लाखों श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर देवता का आशीर्वाद लेते हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार इस पावन स्थल पर आकर उन्हें एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति होती है।

झील में दान की सदियों पुरानी परंपरा

सदियों से यह मान्यता चली आ रही है कि मन्नत पूरी होने पर लोग अपनी इच्छित वस्तु या धनराशि इस झील में अर्पित करते हैं। पैसों के अलावा बड़ी संख्या में लोग सोने-चांदी के आभूषण भी झील में चढ़ाते हैं।

झील के बीचों-बीच एक जाला लगाया गया है, जिसकी मदद से अर्पित की गई वस्तुओं और धनराशि को इकट्ठा किया जाता है। बाद में इन सभी चढ़ावों को मंदिर कमेटी द्वारा एकत्रित कर लिया जाता है।

बर्बरीक का रूप माने जाते हैं देव कमरूनाग

देव कमरूनाग को बर्बरीक का रूप माना जाता है। ये मंडी जनपद के सबसे बड़े देवता के रूप में पूजे जाते हैं और इन्हें जनपद का आराध्य देव कहा जाता है। इन्हें न्याय और वर्षा का देवता माना जाता है, मगर भक्तों का विश्वास है कि वे उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि देवता के प्रति उनकी आस्था अटूट है और यही वजह है कि वे हर बार इस दरबार की ओर खिंचे चले आते हैं। मन्नत पूरी होने पर वे अपनी श्रद्धा के अनुसार झील में दान अर्पित करते हैं।

अब आसान हुआ मंदिर तक का सफर

देव कमरूनाग का मंदिर झील के किनारे स्थित है। पहले यहां तक केवल पैदल चलकर ही पहुंचा जा सकता था, लेकिन अब श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई सड़क मार्ग बना दिए गए हैं। भक्तों ने बताया कि सड़क मार्ग पर बेहतरीन व्यवस्था के चलते इस बार मंदिर तक पहुंचना काफी आसान रहा।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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