अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भारत के खिलाफ बरसीं अमेरिकी सांसद इल्हान उमर, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब विश्व एक घंटा पहले 3
अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के कार्यक्रम में भारत पर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया, जिसका भारत ने यह कहते हुए जवाब दिया कि देश में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति लगातार मजबूत हुई है।

अमेरिकी सांसद इल्हान उमर एक बार फिर भारत को निशाने पर लेती नजर आईं। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी) के एक कार्यक्रम में उन्होंने भारत को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की और देश में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव होने का आरोप लगाया। उन्होंने यहां तक दावा कर दिया कि भारत अल्पसंख्यकों के नरसंहार के आठवें चरण में पहुंच चुका है। इल्हान उमर पहले भी अपने भारत-विरोधी रुख के लिए चर्चा में रही हैं।

अल्पसंख्यकों को लेकर लगाए गंभीर आरोप

आईएएमसी के मंच से इल्हान उमर ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भेदभाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत से सामने आ रही कुछ रिपोर्टें देश को नरसंहार के आठवें चरण में दर्शाती हैं। यह टिप्पणी उन्होंने ग्रेगरी स्टैंटन के नरसंहार के 10 चरणों वाले सिद्धांत का हवाला देते हुए की।

भारत का करारा जवाब

इस बयान पर भारत की ओर से सख्त प्रतिक्रिया सामने आई। भारत सरकार का कहना है कि देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति समय के साथ और मजबूत हुई है। मुस्लिम, सिख और ईसाई जैसे अल्पसंख्यक समुदायों की आबादी देश में बढ़ी है और इन समुदायों के लोग कई महत्वपूर्ण पदों पर भी मौजूद हैं।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में कहा था कि भारत दुनिया के सबसे सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाले देशों में से एक है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के कई अल्पसंख्यक समुदाय भारत को शरण और सुरक्षा देने वाले स्थान के रूप में देखते हैं।

पहले भी देती रही हैं भारत-विरोधी बयान

यह इल्हान उमर का पहला विवादित बयान नहीं है। इससे पहले वह कश्मीर मुद्दे पर भी टिप्पणी कर चुकी हैं और लगातार भारत की नीतियों की आलोचना करती रही हैं। उनके आलोचक उन पर पाकिस्तान समर्थक रुख रखने का आरोप लगाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का बचाव

भारत ने वैश्विक मंचों पर भी अपने रिकॉर्ड को मजबूती से रखा है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी सिबी जॉर्ज ने हाल ही में बताया था कि स्वतंत्रता के समय भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी करीब 11 प्रतिशत थी, जो उसी समय से बढ़ती रही है और अब बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। उन्होंने इसे भारत की विविधता और लोकतंत्र की ताकत बताया।

अल्पसंख्यकों की स्थिति, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों से जुड़ा यह मुद्दा लंबे समय से बहस का विषय रहा है, और कई देश जानबूझकर इस पर सवाल उठाते रहते हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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