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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सेना के खिलाफ नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े नेता ने दावा किया है कि पीओजेके पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है और यह इलाका उसका हिस्सा नहीं है। कमेटी के कई नेता पहले भी इसी तरह की बात दोहरा चुके हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि पाकिस्तान इस क्षेत्र को स्थायी रूप से अपने देश में शामिल करने की कोशिश में जुटा है।
नया ऑडियो संदेश आया सामने
सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर ने एक ताजा ऑडियो संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने बताया कि सरकारी कार्रवाई के चलते वे इस समय छिपे हुए हैं। मीर ने अपने संदेश में कहा कि पीओजेके कोई स्वतंत्र देश नहीं, बल्कि एक “कब्जे वाला क्षेत्र” है। उनका दावा है कि पाकिस्तानी सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने निजी बातचीत में स्वीकार किया है कि 1947 में कबायली हमले कराए गए थे और इसके बाद सेना की कार्रवाई के जरिए पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया।
'मुजफ्फराबाद कमांडर ने भी मानी बात'
मीर के अनुसार, मुजफ्फराबाद सेक्टर के कमांडर ब्रिगेडियर फाइक अयूब ने वहां के नेताओं से कहा था कि आजाद जम्मू-कश्मीर कोई देश नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाला इलाका है, और अब इसे पाकिस्तान के अलग-अलग प्रांतों में मिलाने की योजना बनाई जा रही है।
मीर का कहना है कि यह बयान पाकिस्तान के दशकों पुराने रुख के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि बरसों तक लोगों को यही बताया जाता रहा कि कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और इसका हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के जरिए निकाला जाएगा। ऐसे में अगर अब इस इलाके को पाकिस्तान में मिलाने की बात हो रही है, तो यह पुराने दावों के एकदम उलट है।
महंगाई और दरों के खिलाफ प्रदर्शन
पीओजेके में बीते कुछ महीनों के दौरान बिजली दरों में बढ़ोतरी, सब्सिडी में कटौती, बढ़ती महंगाई और प्रशासनिक दिक्कतों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। शुरुआत में ये प्रदर्शन आर्थिक मुद्दों तक सीमित थे, लेकिन धीरे-धीरे इनका राजनीतिक रंग भी सामने आने लगा। पाकिस्तान प्रशासन ने कई इलाकों में गिरफ्तारियां कीं, छापेमारी की, इंटरनेट पर रोक लगाई और सुरक्षा अभियान चलाए।
मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा बलों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है, जबकि पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये कदम जरूरी थे।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की अपील
अपने ऑडियो संदेश में मीर ने सेना पर जबरन गायब किए जाने, मनमानी गिरफ्तारियों और कार्यकर्ताओं के परिवारों को परेशान करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की और कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की मांग की।
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