दिल्ली में सीएम मोहन यादव ने दिखाई मध्य प्रदेश की ऊर्जा शक्ति, कहा- 2030 के लक्ष्य के लिए पूरी तरह तैयार है राज्य मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 3
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में 7वें अंतरराष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में भाग लिया और राज्य की हरित ऊर्जा उपलब्धियों को साझा किया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए दिल्ली मेट्रो से सफर किया और एमपी को भविष्य का ग्रीन एनर्जी हब बताया।

दिल्ली में सीएम मोहन ने मेट्रो से किया सफर

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने हवाई अड्डे से लेकर शिवाजी स्टेडियम तक दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का उपयोग किया। उनका यह कदम पर्यावरण के प्रति उनकी गंभीरता और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। दिल्ली मेट्रो का संचालन बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा के माध्यम से किया जाता है, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने इसे अपनी हरित ऊर्जा नीतियों के साथ जोड़कर एक संदेश दिया।

मध्य प्रदेश की ऊर्जा यात्रा का प्रदर्शन

इस सम्मेलन और प्रदर्शनी-2026 में मध्य प्रदेश सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक हासिल की गई उपलब्धियों और भविष्य की रूपरेखा का एक विस्तृत विवरण पेश किया। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि उपस्थित थे। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने के विषयों पर मंथन हुआ। मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सहित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी भी इस आयोजन का हिस्सा बने।

ग्रीन एनर्जी हब के रूप में एमपी का उदय

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश वर्ष 2030 तक भारत के 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय संकल्प के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल माहौल, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों की मौजूदगी ने राज्य को एक प्रमुख ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मध्य प्रदेश अब केवल उपभोग करने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि देश को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने वाला एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।

12 वर्षों में 25 गुना क्षमता वृद्धि

मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों का सफर प्रदेश के लिए काफी सफल रहा है। राज्य की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावाट से बढ़कर अब 11,000 मेगावाट के पार पहुंच गई है, जो करीब 25 गुना की वृद्धि दर्शाती है। पिछले 2 वर्षों में पंप्ड हाइड्रो, बायोमास और अन्य नवकरणीय ऊर्जा नीतियों ने इस रफ्तार को और तेज किया है। रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका केस स्टडी हावर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाता है और इसे वर्ल्ड बैंक ग्रुप का प्रतिष्ठित अवार्ड मिला है। साथ ही आगर-शाजापुर-नीमच परियोजना से 2.14 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड टैरिफ प्राप्त हुआ है, जिससे 8 राज्यों में भारतीय रेलवे को हरित ऊर्जा मिल रही है। 25 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 278 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना का लोकार्पण किया था, जो देश में अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है।

ऊर्जा भंडारण और तकनीक पर जोर

मुख्यमंत्री ने बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के महत्व को रेखांकित किया। मुरैना में 440 मेगावाट सौर ऊर्जा और 880 मेगावाट-घंटा की बैटरी भंडारण परियोजना प्रदेश की ऐसी पहली पहल है जिसमें प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली खरीद अनुबंध किए गए हैं। इसके अलावा 4, 6 और 24 घंटे की भंडारण परियोजनाओं पर भी युद्धस्तर पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने 'प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य के लगभग 1.5 लाख घरों में 566 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर सिस्टम लग चुके हैं। साथ ही 1,300 शासकीय इमारतों में भी 48 मेगावाट क्षमता विकसित की जा रही है।

केंद्र सरकार की भूमिका और सहयोग

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत हरित ऊर्जा की दिशा में मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही देश 300 GW की गैर-जीवाश्म क्षमता के आंकड़े को पार करने वाला है। उन्होंने मध्य प्रदेश द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और अन्य राज्यों से भी इसी प्रकार पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

प्रमुख प्रेजेंटेशन के मुख्य बिंदु

  • 4 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण: यह तकनीक सायंकालीन पीक मांग के समय ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में मददगार है।
  • 6 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण: लंबी अवधि के लिए ऊर्जा आपूर्ति और ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने में प्रभावी।
  • 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा: उद्योगों और डेटा सेंटरों जैसी उच्च मांग वाली जगहों के लिए चौबीसों घंटे विश्वसनीय स्वच्छ बिजली प्रदान करना।
  • एनआरईडी (NRED) की भूमिका: नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग राज्य में निवेश को आकर्षित करने और नीतियों को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करता है।
  • रूम्सल (RUMSL) की भूमिका: यह संस्था बड़े पैमाने की सौर और हाइब्रिड परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का काम कर रही है, जो प्रदेश को ऊर्जा भंडारण का केंद्र बनाने में जुटी है।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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