सरकारी नौकरी छोड़कर खेती में आजमाया हाथ, मधुबनी के विपिन झा सालाना कमा रहे 30 से 35 लाख रुपये बिहार 2 महीने पहले 47
बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले विपिन कुमार झा ने अपनी सरकारी नौकरी को अलविदा कहकर खेती को अपना करियर बनाया है। आज वे पपीते की बागवानी से हर साल लाखों की कमाई कर रहे हैं और दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं।

शिक्षित युवाओं के लिए प्रेरणा बने विपिन

आज के दौर में जब युवा बेहतर भविष्य की तलाश में शहरों या विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं, बिहार के मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड स्थित खोईर गांव के विपिन कुमार झा ने एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने अपनी सम्मानजनक सरकारी नौकरी को त्यागकर आधुनिक कृषि को अपने जीवन का आधार बनाया है। विपिन न केवल खुद पपीते की खेती से हर साल 30 से 35 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं, बल्कि अपने स्टार्टअप के जरिए 25 स्थानीय लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।

उच्च शिक्षा के बाद खेती का फैसला

विपिन कुमार झा की शैक्षणिक योग्यता किसी को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने विज्ञान से एम.एस.सी (M.Sc.) करने के साथ एमबीए (MBA) की डिग्री भी हासिल की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मत्स्य पालन और कृषि क्षेत्र में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हॉर्टीकल्चर विभाग में ब्लॉक स्तर पर फिशरीज एक्सटेंशन ऑफिसर के तौर पर कार्य किया, लेकिन जल्द ही उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया। विपिन का मानना है कि उनका लक्ष्य किसी के अधीन काम करना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज के लिए कुछ करना था।

दो एकड़ जमीन से शुरू किया सफर

नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने अपने गांव में 'एच.सी. फार्म' नाम से एक स्टार्टअप की शुरुआत की। वर्तमान में उन्होंने 2 एकड़ जमीन पर पपीते की खेती शुरू की है। इसके साथ ही वे अपने फार्म में अन्य फलों की बागवानी भी कर रहे हैं। विपिन बताते हैं कि कृषि के क्षेत्र में पपीता एक ऐसी फसल है जो कम समय में बेहतर मुनाफा देने की क्षमता रखती है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण बाजार में पपीते की मांग पूरे साल बनी रहती है।

दूसरों को दे रहे हैं ट्रेनिंग

विपिन कुमार झा सिर्फ अपनी कमाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अन्य युवाओं को भी कृषि के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे युवाओं को खेती से जुड़ी मुफ्त ट्रेनिंग देते हैं और उन्हें अपनी पूंजी का निवेश कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं। उनका मानना है कि यदि अधिक से अधिक शिक्षित युवा खेती की ओर रुख करेंगे, तो आने वाले समय में देश में उत्पन्न होने वाले संभावित खाद्य संकट को रोका जा सकता है। उनके अनुसार, कृषि के क्षेत्र में न केवल शुद्ध वातावरण मिलता है, बल्कि कड़ी मेहनत से लाखों का मुनाफा भी कमाया जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप