पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा को पछाड़ने के लिए योगी का मास्टरप्लान, अखिलेश की चुनौती बढ़ी उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। अलीगढ़ दौरे के जरिए उन्होंने अखिलेश यादव के पीडीए समीकरण को चुनौती देने के लिए नई रणनीतिक बिसात बिछाई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भाजपा की नजर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में झोंक दी है। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अलीगढ़ संभाग की सभी प्रमुख सीटों पर मिली करारी हार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं स्थिति की कमान संभाल ली है। इस क्षेत्र को सत्ता का प्रवेश द्वार माना जाता है और यहां की 110 से अधिक विधानसभा सीटों पर भाजपा की नजरें टिकी हुई हैं।

योगी आदित्यनाथ का नया चक्रव्यूह

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अलीगढ़ का दौरा किया है। इसे केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट के रूप में देखा जा रहा है। अलीगढ़ में उन्होंने ₹462 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता के बीच सरकार की छवि को सुधारना अब उनकी प्राथमिकता है।

सोशल इंजीनियरिंग और सुरक्षा का दांव

लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठबंधन ने दलितों और अति-पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को प्रभावित किया था, जो भाजपा के लिए एक बड़ा झटका था। अब मुख्यमंत्री योगी का मुख्य ध्यान निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है:

  • दलित और ओबीसी वर्ग को पुनः राष्ट्रवादी एजेंडे और सुरक्षा के मुद्दे पर वापस लाना।
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा सुनिश्चित करना।
  • कानून-व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाना ताकि लोगों का भरोसा कायम हो सके।

अखिलेश के सामने बड़ी चुनौती

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, मेरठ और मुरादाबाद जैसे जिले भाजपा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय नेताओं को गुटबाजी खत्म कर सीधे जनता के बीच जाने के सख्त निर्देश दिए हैं। अब यह साफ हो गया है कि आगामी चुनाव में टिकट बंटवारे से लेकर जमीनी स्तर के जातिगत समीकरणों तक का रिमोट कंट्रोल मुख्यमंत्री के हाथ में ही रहेगा। मुजफ्फरनगर और कैराना जैसे संवेदनशील इलाकों में भी भाजपा अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिससे 2027 का चुनावी मुकाबला और अधिक आक्रामक होने के आसार हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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