उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे की नियुक्ति और सेवा विस्तार को चुनौती देने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अहम कदम उठाते हुए राज्य सरकार, विधानसभा सचिवालय और विधानसभा अध्यक्ष से जवाब मांगा है। अदालत ने सभी पक्षकारों को 6 जुलाई तक अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदीप कुमार दुबे 65 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसके बावजूद बिना किसी वैध आदेश के तीन साल से अधिक समय से वे प्रमुख सचिव के पद पर बने हुए हैं। याचिकाकर्ता ने उनकी नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठाते हुए इस मामले में ‘को वारंटो’ रिट जारी करने की मांग की है।
सचिवालय की दलील
सुनवाई के दौरान विधानसभा सचिवालय और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि यह याचिका पोषणीय नहीं है, क्योंकि प्रदीप दुबे किसी लोक पद पर कार्यरत नहीं हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील पर तत्काल कोई फैसला नहीं सुनाया और सभी पक्षकारों को अपना संक्षिप्त अथवा विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का अवसर प्रदान किया।
नियुक्ति को बताया नियमों के विपरीत
याचिका में प्रदीप दुबे की प्रारंभिक नियुक्ति से लेकर वर्तमान कार्यकाल तक की पूरी अवधि को नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ बताया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि वे बिना किसी वैध अधिकार के प्रमुख सचिव, विधानसभा के पद पर बने हुए हैं।
किसने दाखिल की याचिका और अगली सुनवाई
यह याचिका विधानसभा अध्यक्ष के पूर्व सूचना अधिकारी कर्मेश प्रताप सिंह की ओर से दाखिल की गई है। अदालत ने प्रदीप कुमार दुबे को भी इस मामले में विपक्षी पक्षकार बनाया है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी, जब सभी पक्षों के जवाब के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।
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