नींबू के बाग में अपनाएं यह आसान तरकीब, 45 डिग्री तापमान में भी न झुलसेगा पेड़ और न जलेगा फल मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 5
उद्यानिकी विशेषज्ञ निर्मल कुमार गोयल के अनुसार तेज गर्मी में नींबू के पौधों को बचाने के लिए सिंचाई का सही समय, थाला पद्धति और गोबर-वर्मी कंपोस्ट का संतुलित उपयोग सबसे कारगर उपाय है। इससे फल जलने से बचते हैं और पैदावार भी बेहतर होती है।

मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में इन दिनों तेज धूप और बदलते मौसम ने नींबू की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई बागों से नींबू के फल जलने और खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। अगर आपके बाग में भी ऐसी ही समस्या है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। शिवपुरी के उद्यानिकी विभाग के उप-संचालक निर्मल कुमार गोयल ने एक ऐसा कारगर उपाय बताया है, जिससे फल जलने से भी बचेंगे और पैदावार भी बंपर होगी।

सबसे पहले बदलें सिंचाई का समय

विशेषज्ञ निर्मल कुमार गोयल के अनुसार, इस मौसम में नींबू के पौधों को सुरक्षित रखने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि आप बाग में किस समय पानी दे रहे हैं। गलत समय पर की गई सिंचाई पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है। किसानों को चाहिए कि दोपहर की तेज धूप के दौरान सिंचाई बिल्कुल न करें। पानी देने का सबसे उपयुक्त समय या तो सुबह का होता है या फिर शाम का।

थाला पद्धति से सिंचाई है सबसे बेहतर

अगर आप सीधे पौधों की जड़ों में पानी डालते हैं, तो इस आदत को बदल लें। विशेषज्ञ के मुताबिक, सिंचाई से पहले पौधों के चारों ओर थाला (ट्री बेसिन या रिंग) बना लेना चाहिए।

थाला बनाने के अनेक फायदे हैं। इससे पानी सीधे पौधे की मुख्य जड़ के संपर्क में आकर उसे सड़ाने के बजाय चारों ओर से नमी बनाए रखता है। साथ ही पानी की बर्बादी रुकती है और पौधों को पर्याप्त नमी मिलती रहती है।

खाद देने का सही तरीका

सिर्फ पानी देना ही काफी नहीं है, बल्कि इस मौसम में पौधों को सही पोषण की भी आवश्यकता होती है। उप-संचालक निर्मल कुमार गोयल ने बताया कि खाद देते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

  • देसी गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट: बाग में केवल अच्छी तरह सड़ी हुई देसी गोबर की खाद या केंचुआ खाद (वर्मी कंपोस्ट) का ही उपयोग करें।
  • गुड़ाई जरूरी है: खाद को सीधे ऊपर से न डालें। पहले पौधों के चारों ओर अच्छी तरह गुड़ाई कर लें।
  • मिश्रण बनाएं: गुड़ाई के बाद मिट्टी और खाद को आपस में अच्छी तरह मिलाकर थाले में डालें।

ऐसा करने से खाद के पोषक तत्व सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचते हैं और नींबू का फल चमकदार व बड़ा बनता है।

विशेषज्ञ की सलाह से बढ़ेगा मुनाफा

चंबल और शिवपुरी क्षेत्र के किसानों के लिए उद्यानिकी विभाग की यह सलाह संजीवनी साबित हो सकती है। अगर आप अपने नींबू के बाग में सिंचाई का सही समय, थाला पद्धति और गोबर-वर्मी कंपोस्ट का उचित मिश्रण अपनाते हैं, तो फलों के जलने की समस्या काफी हद तक कम होगी और बाजार में नींबू के बेहतर दाम भी मिल सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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