यूपीआई पेमेंट पर चार्ज की खबरों के बीच सरकार की बड़ी सफाई, क्या आपकी जेब पर पड़ेगा असर व्यापार 2 घंटे पहले 6
यूपीआई के जरिए भुगतान करने पर शुल्क लगने की अटकलों के बीच केंद्र सरकार और एनपीसीआई ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आम ग्राहकों को किसी भी तरह का ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं देना होगा।

यूपीआई भुगतान को लेकर स्पष्ट हुआ सरकार का रुख

भारत में साल 2016 में यूपीआई की शुरुआत के बाद से डिजिटल लेनदेन का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। अब पैसे भेजना और सामान खरीदना बेहद आसान हो गया है। हालांकि, हालिया चर्चाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है कि क्या अब यूपीआई के जरिए भुगतान करना महंगा होने वाला है। इस विषय पर अब सरकार और नेशनल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि सामान्य उपयोगकर्ताओं पर इस शुल्क का कोई बोझ नहीं पड़ेगा।

ग्राहकों को नहीं देना होगा कोई शुल्क

सरकार ने इस मामले में आम जनता को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से कोई अतिरिक्त ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा। लोग बिना किसी डर के अपने दैनिक लेनदेन जारी रख सकते हैं। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी पी2पी ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया पूरी तरह से मुफ्त बनी रहेगी। इसका मतलब है कि आप अपनों को जो पैसे भेजते हैं, उस पर भविष्य में भी कोई शुल्क लागू नहीं होगा।

मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर क्या है नियम

दुकानदारों और मर्चेंट के लिए भी सरकार ने अच्छी खबर दी है। अधिकतर यूपीआई लेनदेन दुकानदारों के लिए भी निशुल्क रहेंगे। अगर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर को लागू किया जाता है, तो यह केवल कुछ चुनिंदा बड़े लेनदेन पर ही प्रभावी होगा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि यदि एमडीआर जैसा कोई शुल्क लागू होता भी है, तो वह डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले वर्तमान शुल्कों की तुलना में बहुत ही मामूली होगा। सभी प्रकार के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर इसे एक साथ लागू करने की कोई योजना नहीं है।

एमडीआर और कानूनी प्रक्रिया

यूपीआई पर एमडीआर लगाने से संबंधित नीतिगत निर्णय संसद में प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिए जाएंगे। सरकार ने इसके लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल 2026 के संसद से पारित होने के बाद ही आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी। शुल्क लगाने या न लगाने और इसकी मात्रा कितनी होगी, इसका अंतिम निर्णय एनपीसीआई के नेतृत्व वाली यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी करेगी। सरकार ने दोहराया है कि दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले यूपीआई भुगतान पर नागरिकों से चार्ज लेने की कोई योजना सरकार के विचाराधीन नहीं है।

क्यों जरूरी है यूपीआई के लिए रेवेन्यू मॉडल

यूपीआई के विस्तार के पीछे सरकार का तर्क है कि इसे दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना आवश्यक है। वर्तमान में यूपीआई का उपयोग अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। जुलाई 2026 में यूपीआई के माध्यम से कुल 2,366 करोड़ ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए थे, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये थी। बढ़ती लोकप्रियता के साथ साइबर सुरक्षा, तकनीकी सुधार और फ्रॉड रोकने के लिए बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की लगातार आवश्यकता बनी रहती है। सरकार का मानना है कि केवल सरकारी सब्सिडी के दम पर इस विशाल तंत्र का विस्तार करना संभव नहीं है। यूपीआई को भविष्य में भी मजबूत और आत्मनिर्भर बनाए रखने के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल विकसित करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि इसकी सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।

आधिकारिक जानकारी पर ही करें भरोसा

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक खबरों से दूर रहें। किसी भी तरह की पुष्टि के लिए केवल वित्त मंत्रालय, आरबीआई या एनपीसीआई द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। बिना पुष्टि किए गए संदेशों या सूचनाओं को आगे भेजने से बचें। आज के समय में जब यूपीआई 11 देशों में अपनी पहुंच बना चुका है, ऐसी अफवाहों से डिजिटल पेमेंट की बढ़ती लोकप्रियता को प्रभावित होने से बचाना जरूरी है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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