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एक घंटा पहले
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त्योहारों के मौसम में चीनी की महंगाई पर सरकार की नजर
आगामी त्योहारों के मद्देनजर देश में चीनी की कीमतों में हो रही अप्रत्याशित बढ़ोतरी को थामने के लिए केंद्र सरकार एक्शन मोड में है। देश के कई हिस्सों में चीनी की खुदरा कीमतें 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने के भीतर चीनी के औसत भाव 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गए हैं। इन हालातों को देखते हुए सरकार ने कीमतों को स्थिर करने और घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम निर्णय लिए हैं। सरकार लगातार पूरे घटनाक्रम पर निगरानी रख रही है ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
उत्पादन में कमी की मुख्य वजहें
चीनी की कीमतों में आई तेजी के पीछे उत्पादन का अनुमान से कम रहना एक बड़ा कारण है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, गन्ने की फसल को इस सीजन में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के अलावा अत्यधिक बारिश और जलभराव का सामना करना पड़ा है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। इस सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 LMT रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि राज्यों ने शुरुआत में करीब 343 LMT उत्पादन की उम्मीद जताई थी। इसके अलावा, त्योहारों की मांग बढ़ने और बाजार में जमाखोरी व सट्टेबाजी की गतिविधियों ने भी कीमतों को ऊपर खींचने का काम किया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि एथनॉल बनाने के लिए चीनी का उपयोग कीमतों में बढ़ोतरी का कारण नहीं है। एथनॉल के लिए चीनी डायवर्जन की हिस्सेदारी 2022-23 में 12 प्रतिशत थी, जो घटकर 2025-26 में 9 प्रतिशत रह गई है।
वैश्विक बाजार में चीनी का हाल
भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चीनी की आपूर्ति दबाव में है। साल 2026-27 में वैश्विक स्तर पर लगभग 33 LMT चीनी की कमी होने का अनुमान जताया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून को चीनी की कीमत 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई है। इसका मतलब है कि सिर्फ दो महीने के भीतर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में 16 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है।
किसानों और मिलों के लिए एथनॉल का महत्व
भारत में सामान्य तौर पर सालाना 320-340 LMT चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत 280-290 LMT के आसपास रहती है। जब उत्पादन ज्यादा होता है, तो अतिरिक्त चीनी का स्टॉक जमा हो जाता है जिससे चीनी मिलों की पूंजी फंस जाती है और इसका नकारात्मक असर गन्ना किसानों को मिलने वाले भुगतान पर पड़ता है। ऐसे में अतिरिक्त चीनी को एथनॉल में बदलने की नीति ने मिलों को आर्थिक मजबूती दी है। इसका परिणाम यह है कि 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 सीजन के लिए गन्ना बकाये का 97 प्रतिशत हिस्सा किसानों को भुगतान किया जा चुका है।
जमाखोरी रोकने के लिए सख्त नियम
सरकार ने बाजार में सट्टेबाजी और जमाखोरी को रोकने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं:
- 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट तय की गई है।
- 1 सितंबर से बड़े खरीदार अब अपनी 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक के रूप में नहीं रख पाएंगे।
- केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें विभिन्न चीनी मिलों का औचक निरीक्षण कर स्टॉक की जांच कर रही हैं।
- घरेलू आपूर्ति को बढ़ाने के मकसद से 10 LMT कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दे दी गई है।
- राज्यों और चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि वे 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई का काम शुरू कर दें।
सरकार का अनुमान है कि इस बार अक्टूबर महीने में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 LMT से काफी अधिक होकर 10 LMT के आंकड़े को पार कर सकता है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के हितों का संतुलन बनाए रखने के लिए कीमतों और बाजार के रुझानों पर कड़ी नजर बनाए रखेगी।
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