सौर ऊर्जा-8: क्या छत पर सोलर पैनल लगाते ही बिजली का बिल जीरो हो जाएगा? एक्सपर्ट से समझिए सच्चाई व्यापार एक घंटा पहले 1
घर की छत पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाने से बिजली बिल में बड़ी कमी आती है, लेकिन बिल पूरी तरह जीरो होगा या नहीं, यह नेट मीटरिंग समेत कई शर्तों पर निर्भर करता है। CEEW की एक्सपर्ट भावना त्यागी और देश के पहले सर्वे की रिपोर्ट से जानिए असल तस्वीर।

अगर आप भी अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रहे हैं, तो यह वाकई एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। आपके अपने घर पर ही पैदा होने वाली बिजली से रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकती हैं। सिर्फ भारत सरकार ही नहीं, बल्कि लगभग हर विशेषज्ञ भी यही राय दे रहा है। बावजूद इसके, सौर ऊर्जा को लेकर लोगों के मन में एक आम धारणा बनी हुई है कि छत पर पैनल लगते ही बिजली का बिल देना बंद हो जाएगा, और अगर घर में ग्रिड से कनेक्शन भी हो तो भी बिल पूरी तरह शून्य आएगा। सवाल यह है कि क्या हकीकत में ऐसा होता है?

क्या रूफटॉप सोलर लगाने पर वाकई बिल जीरो आता है?

इस सवाल का जवाब हां भी है और ना भी। यह संभव है कि आपका बिजली बिल जीरो आए, क्योंकि भारत में हजारों लोगों को सचमुच जीरो बिल मिला है। लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें जुड़ी हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। यानी यह कोई हर हाल में लागू होने वाली बात नहीं है, बल्कि कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

सर्वे क्या कहता है

‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर’ (CEEW) के एक नए अध्ययन के मुताबिक, रूफटॉप सोलर लगवाने के इच्छुक 81 प्रतिशत परिवारों ने इसे अपनाने की सबसे बड़ी वजह बिजली बिलों में कमी को बताया है। अध्ययन में शामिल जिन परिवारों ने रूफटॉप सोलर अपनाया, उन्हें बिलों में बड़ी बचत का फायदा मिला और इन परिवारों ने अपने बिजली बिलों में औसतन 71 प्रतिशत की कमी दर्ज की।

अध्ययन यह भी बताता है कि रूफटॉप सोलर लगाने वाले 93% से ज्यादा लोग बिजली बिल में हुई बचत से संतुष्ट हैं। वहीं 87% लोग दूसरों को भी अपने सोलर वेंडर से सोलर सिस्टम लगवाने की सलाह देने के लिए तैयार हैं। इन आंकड़ों से एक बात तो साफ है कि सोलर पैनल से बिजली बिलों में अच्छी-खासी कटौती देखने को मिल रही है। हालांकि बिल पूरी तरह जीरो होगा या नहीं, यह कुछ परिस्थितियों पर ही निर्भर करता है।

आम धारणा बनाम असलियत

ज्यादातर लोग यही मान लेते हैं कि छत पर सोलर पैनल लगते ही बिजली बनती रहेगी और घर में इस्तेमाल होती रहेगी, न कोई बिल भरना पड़ेगा और न ही किसी कनेक्शन की जरूरत रहेगी। यानी बिजली का बिल पूरी तरह शून्य हो जाएगा। लेकिन असलियत इससे कुछ अलग है।

नेट मीटरिंग कैसे काम करती है?

भारत में अधिकतर घरेलू सोलर सिस्टम नेट मीटरिंग पर चलते हैं। दिन के समय सोलर पैनल बिजली बनाते हैं। सबसे पहले घर की अपनी जरूरत पूरी होती है और जो बिजली बच जाती है, वह ग्रिड में चली जाती है। वहीं रात के वक्त या बादल वाले मौसम में जब पैनल पर्याप्त बिजली नहीं बना पाते, तब ग्रिड से बिजली ली जाती है। यही तालमेल तय करता है कि महीने के अंत में आपका बिल कितना आएगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!