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एक घंटा पहले
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जब तक आसमान में सूरज है, तब तक सौर ऊर्जा का स्रोत बना रहेगा। यही कारण है कि कभी न खत्म होने वाली इस ऊर्जा का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार भी हर घर सूर्य बिजली योजना के तहत लोगों को सोलर पैनल लगवाने की सलाह दे रही है, ताकि देश सौर बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बन सके। मकसद यही है कि हर घर का अपना रूफटॉप सोलर सिस्टम हो, हर किसी के पास अपनी बिजली हो, न बिजली कटौती की समस्या रहे और न ही बिजली के बिल की चिंता।
गर्मियों में तो आसमान में तेज धूप रहती है और सुबह से शाम तक सोलर पैनल इतनी बिजली बना देते हैं कि एक घर में उसका पूरा उपयोग भी नहीं हो पाता। लेकिन सवाल यह है कि सर्दियों में क्या होता है? जब ठंड के मौसम में सूरज भी कम दिखाई देता है और आसमान धुंध तथा अंधेरे से घिरा रहता है, तब ये पैनल किस तरह काम करते हैं? क्या उस दौरान भी बिजली बनती है? क्या इतनी बिजली बन पाती है कि पूरे घर का खर्च चल जाए? और अगर कोई घर पूरी तरह सोलर पैनल पर ही निर्भर हो जाए, तो क्या वहां 24 घंटे रोशनी रह सकती है?
‘सौर ऊर्जा-सोलर पैनल’ को लेकर चलाई जा रही इस सीरीज की छठी कड़ी में इन्हीं सवालों के जवाब विस्तार से जानने के लिए हमने काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी से बातचीत की।
सर्दियों में सोलर पैनल कैसे काम करते हैं?
भावना त्यागी बताती हैं कि सोलर पैनल सर्दियों में भी काम करते रहते हैं, क्योंकि ये बिजली बनाने के लिए सूर्य की रोशनी का उपयोग करते हैं, न कि उसकी गर्मी का। उनके मुताबिक सर्दियों में दिन छोटे होते हैं और धूप भी अपेक्षाकृत कमजोर रहती है, फिर भी पैनल बिजली बनाते हैं। हां, इस दौरान बनने वाली बिजली की मात्रा जरूर कम हो जाती है।
क्या पूरी तरह सौर ऊर्जा पर निर्भर रहना संभव है?
सवाल यह भी उठता है कि अगर कोई घर पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आश्रित हो, तो क्या उसे सर्दियों में भी पर्याप्त बिजली मिल पाएगी। इसी अहम मुद्दे पर विशेषज्ञ की राय इस चर्चा का केंद्र है।
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