पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का संकट: फिर मिला IMF का साथ, लेकिन कर्ज के जाल में फंस गया मुल्क व्यापार एक घंटा पहले 5
पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.21 अरब डॉलर की नई सहायता मिलने वाली है, लेकिन देश के बढ़ते कर्ज और गिरवी रखी जा रही अर्थव्यवस्था ने भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पाकिस्तान का खजाना और IMF की उम्मीद

पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के पास अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं है। बार-बार अपनी वित्तीय नैया को पार लगाने के लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के दर पर दस्तक देनी पड़ती है। ताजा घटनाक्रम में, IMF ने पाकिस्तान के लिए 1.21 अरब डॉलर की फंडिंग का रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि, यह राहत अभी पूरी तरह से खाते में नहीं आई है क्योंकि इसके लिए अभी IMF के एक्जीक्यूटिव बोर्ड की औपचारिक मंजूरी का इंतजार है। यह स्थिति दर्शाती है कि पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिरता के लिए पूरी तरह से बाहरी कर्ज पर निर्भर हो चुका है।

कर्ज का बोझ और गिरवी रखने जैसी स्थिति

शहबाज शरीफ की सरकार जिस तरह से कर्ज ले रही है, उसे लेकर हर तरफ चिंता जाहिर की जा रही है। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने देश को कर्ज के जाल में इस कदर फंसा दिया है कि मानो पूरा देश गिरवी रख दिया गया हो। आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 तक पाकिस्तान पर कुल सरकारी और सरकार की गारंटी वाला कर्ज लगभग 307.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। यह आंकड़ा देश की जीडीपी का 76.6 फीसदी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जो पैसा सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं, बिजली और रोजगार सृजन में खर्च होना चाहिए, वह भारी-भरकम पुराने कर्ज की भरपाई में जा रहा है।

ब्याज और किस्तों का चक्रव्यूह

पाकिस्तान के सामने चुनौती सिर्फ नया कर्ज लेने की नहीं, बल्कि पुराने कर्ज की किस्तों और ब्याज को चुकाने की भी है। IMF के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 के दौरान पाकिस्तान का कुल कर्ज भुगतान करीब 86.3 अरब डॉलर था। चौंकाने वाली बात यह है कि 2025-26 के लिए यह अनुमानित आंकड़ा और बढ़कर 92.1 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। पाकिस्तान की स्थिति ऐसी हो गई है कि घर का खर्च चलाने के लिए लिया गया नया उधार सीधे पुराने कर्ज की किस्तों को चुकाने में खर्च हो रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में कोई वास्तविक सुधार नहीं हो पा रहा है।

IMF की कड़ी शर्तें और जिम्मेदारी

दुनिया का कोई भी संस्थान मुफ्त में पैसा नहीं देता है, और IMF की मदद के साथ कड़ी शर्तें जुड़ी होती हैं। पाकिस्तान को यह सहायता तभी मिलती है जब वह IMF की कठोर शर्तों को स्वीकार करता है। इसमें मुख्य रूप से टैक्स में बढ़ोतरी, सरकारी खर्चों पर नियंत्रण, ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार और अर्थव्यवस्था के ढांचे में व्यापक बदलाव करना शामिल है। इन सुधारों के चलते आम जनता पर महंगाई की दोहरी मार पड़ती है। हर बार जब 1.21 अरब डॉलर जैसा नया पैकेज आता है, तो वह पाकिस्तान के लिए राहत के साथ-साथ आर्थिक नीतियों में नई सख्ती और जिम्मेदारी की पोटली भी साथ लेकर आता है।

कौन-कौन है कर्जदार की सूची में

पाकिस्तान का कर्ज का जाल सिर्फ IMF तक सीमित नहीं है। जून 2025 तक पाकिस्तान के कुल सरकारी कर्ज में बाहरी कर्ज की मात्रा लगभग 107 अरब डॉलर आंकी गई थी। इसमें चीन की भूमिका सबसे अहम और भारी है। पाकिस्तान पर चीन का द्विपक्षीय कर्ज करीब 23.5 अरब डॉलर है, जबकि चीनी वाणिज्यिक बैंकों का बकाया कर्ज भी 5.7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इन तमाम आंकड़ों के सामने 1.21 अरब डॉलर की मदद देखने में छोटी लग सकती है, लेकिन पाकिस्तान के गिरते विदेशी मुद्रा भंडार और तात्कालिक भुगतान संकट को टालने के लिए यह उसके लिए जीवनदान जैसी है। फिलहाल पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था इसी तरह के छोटे-बड़े कर्ज के सहारे चल रही है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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