भारतीय अर्थव्यवस्था पर KKR का बड़ा दावा, अगले एक दशक में 8 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा छूने की तैयारी व्यापार 2 घंटे पहले 8
वैश्विक निवेश कंपनी KKR ने भारतीय अर्थव्यवस्था की भविष्य की राह को लेकर सकारात्मक अनुमान व्यक्त किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत आने वाले 10 वर्षों में 8 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी हासिल करने की क्षमता रखता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार और संभावनाएं

दुनिया भर के देश इस समय महंगाई, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसे संकटों से जूझ रहे हैं, फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर वैश्विक स्तर पर एक बड़ी उम्मीद जताई जा रही है। प्रमुख वैश्विक निवेश फर्म कोहलबर्ग क्राविस रॉबर्ट्स एंड कंपनी (KKR) ने अपने ताजा आकलन में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अगले 10 साल के भीतर 8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के स्तर तक पहुंचने की पूरी संभावना है। यह अनुमान भारत की विकास यात्रा के प्रति निवेशकों के गहरे भरोसे को दर्शाता है।

4 ट्रिलियन डॉलर का पड़ाव और आर्थिक सुधार

KKR की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत पहले ही 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर चुका है। अब देश की नजर इस आंकड़े को दोगुना करने पर टिकी है। फर्म ने साफ तौर पर माना है कि पिछले एक दशक में सरकार द्वारा उठाए गए ढांचागत सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती दी है। इन सुधारों में मुख्य रूप से निम्नलिखित कदम शामिल हैं:

  • GST का कार्यान्वयन।
  • इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) का प्रभावी उपयोग।
  • श्रम बाजार (लेबर मार्केट) को अधिक औपचारिक बनाना।

KKR के विशेषज्ञों का कहना है कि इन बड़े सुधारों का असर फौरी तौर पर नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रूप से अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करने के तौर पर सामने आ रहा है।

विकास की दर और नॉमिनल GDP की संभावना

आर्थिक सुधारों के सकारात्मक प्रभाव के चलते, KKR का मानना है कि भारत आने वाले समय में 10 से 11% की नॉमिनल GDP ग्रोथ हासिल करने की क्षमता रखता है। कंपनी का स्पष्ट मत है कि भारत की विकास गाथा अभी अपने शुरुआती चरणों में ही है और लागू किए गए सुधारों का असली परिणाम आने वाले वर्षों में और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

उपभोग और बुनियादी ढांचे का प्रभाव

भारत की लंबी अवधि की विकास रणनीति में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और घरेलू खपत का बड़ा योगदान है। जैसे-जैसे लोगों की जेब में पैसा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सामान और सेवाओं की मांग बढ़ रही है, जो आर्थिक चक्र को तेज कर रही है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें जो लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच रही हैं, वे अल्पकालिक तौर पर महंगाई और आयात बिल के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसके विपरीत, सरकार द्वारा सड़क, रेलवे, बंदरगाहों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा निरंतर निवेश कारोबार करने की लागत को घटा रहा है, जो विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।

सर्विसेज सेक्टर और AI का भविष्य

भारतीय अर्थव्यवस्था में सर्विसेज सेक्टर मुख्य इंजन की भूमिका निभा रहा है। KKR की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्विसेज एक्सपोर्ट और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का विस्तार भारत को वैश्विक बाजार में नई पहचान दे रहा है। आने वाले दौर में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस क्षेत्र के लिए ग्रोथ का नया और बड़ा जरिया बनकर उभरेगा, जिससे उत्पादकता में अभूतपूर्व उछाल आने की उम्मीद है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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