होर्मुज स्ट्रेट में फंसी एलपीजी खेप: क्या भारत को चुकाना पड़ा कोई टैक्स? हरदीप पुरी ने किया बड़ा खुलासा व्यापार एक महीने पहले 62
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट संकट के दौरान भारत ने अपने एलपीजी टैंकरों को बिना कोई अतिरिक्त शुल्क दिए सुरक्षित निकाला।

होर्मुज स्ट्रेट संकट और भारत का रुख

पश्चिम एशिया के संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत हासिल की है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस बात की पुष्टि की है कि होर्मुज स्ट्रेट के करीब चार महीने तक बाधित रहने की स्थिति में भी भारत को अपने 12 से अधिक एलपीजी टैंकरों को निकालने के लिए किसी भी प्रकार का टैक्स या टोल नहीं देना पड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने पूरी कुशलता के साथ अपने संसाधनों को सुरक्षित बाहर निकाला है।

संकट के दौरान घरेलू उत्पादन में वृद्धि

फरवरी के अंत में ईरान पर हुए हमलों के बाद जब होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया, तब भारत के सामने रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया था। भारत अपनी रसोई गैस की जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और इसमें से 90 प्रतिशत आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होकर आती है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने बहुत कम समय के नोटिस पर अपने तंत्र को रीकॉन्फिगर किया और घरेलू स्तर पर गैस उत्पादन को तेजी से बढ़ाया। इसका परिणाम यह रहा कि देश में इस ऐतिहासिक ऊर्जा संकट के दौरान भी कहीं कोई किल्लत पैदा नहीं हुई।

ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति

मंत्री ने बताया कि एलपीजी की आपूर्ति की संवेदनशीलता कच्चे तेल के मुकाबले कहीं अधिक थी, क्योंकि कच्चे तेल का 70 प्रतिशत आयात पहले ही होर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्तों से किया जा रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने मार्च की अपनी ब्रीफिंग में यह स्पष्ट किया था कि सरकार ने इस बड़े व्यवधान से निपटने के लिए पहले से ही रणनीतिक तैयारी कर रखी थी। आज की स्थिति यह है कि देश के सभी गैस पंप खुले हैं और आपूर्ति का स्टॉक पूरी तरह भरा हुआ है। सरकार की इसी सोची-समझी रणनीति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचे ऊर्जा संकट का कोई भी नकारात्मक प्रभाव भारत के आम उपभोक्ताओं की रसोई तक नहीं पहुंच सका और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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