चीनी के दाम बढ़ने के पीछे एथनॉल नहीं, उद्योग की साजिश: सरकार ने जारी की चेतावनी व्यापार 3 घंटे पहले 2
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे आर्टिफिशियल बताया है और उद्योग जगत को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

चीनी की कीमतों पर सरकार का बड़ा बयान

देश में इन दिनों चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर असर डाला है। इस बीच, सरकार ने शुक्रवार को उन तमाम दावों को खारिज कर दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल के कारण बाजार में इसके दाम आसमान छू रहे हैं। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने साफ तौर पर कहा कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और इस कृत्रिम संकट के लिए पूरी तरह से चीनी उद्योग ही जिम्मेदार है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए चीनी की कोई कमी नहीं है, फिर भी कीमतें तेजी से बढ़ाई गई हैं, जो कि पूरी तरह से अनुचित है।

जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई

चीनी उद्योग के इस रवैये को देखते हुए सरकार ने राज्यों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे अपने स्तर पर जमाखोरों, मुनाफाखोरों और सट्टेबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। सरकार इस बात को लेकर बेहद गंभीर है कि कोई भी पक्ष बाजार में चीनी की किल्लत जैसी स्थिति पैदा करके अनुचित लाभ न उठाए। इसके अलावा, चीनी मिलों को निर्देशित किया गया है कि वे इस साल 15 अक्टूबर के आसपास पेराई सत्र की शुरुआत करें, ताकि बाजार में नई चीनी की आपूर्ति जल्द हो सके।

कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी का गणित

खाद्य सचिव के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ समय में चीनी की कीमतों में जो उछाल आया है, उसका कोई ठोस आधार नजर नहीं आता है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:

  • 20 जुलाई को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 48 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
  • वर्तमान में यह कीमत बढ़कर 56 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है।
  • मिलों के स्तर पर स्थिति और भी चौंकाने वाली है, जहां सात से दस दिनों के भीतर दाम 47-48 रुपये से सीधे 62 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं।

सचिव ने जोर देकर कहा कि महज 15 दिनों के भीतर इस तरह की मूल्य वृद्धि का कोई तार्किक कारण नहीं है और यह पूरी तरह से बाजार में कृत्रिम रूप से बनाई गई कमी का परिणाम है।

एथनॉल को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियां

चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथनॉल को जिम्मेदार ठहराए जाने के दावों पर संजीव चोपड़ा ने विराम लगा दिया। उन्होंने बताया कि चालू विपणन वर्ष 2025-26 में एथनॉल बनाने के लिए केवल 28 लाख टन चीनी का इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब विविधीकरण की नीति के तहत एथनॉल के उत्पादन में चीनी की भूमिका काफी कम हो गई है। वर्तमान में एथनॉल का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से बनता है, जबकि शेष उत्पादन मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाजों पर आधारित है।

उत्पादन और उपलब्धता की वास्तविक स्थिति

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, विपणन सत्र 2025-26 में चीनी का कुल उत्पादन अनुमानित 343 लाख टन से गिरकर 306 लाख टन रहने की संभावना है। हालांकि, देश की सालाना घरेलू मांग 280-285 लाख टन ही है, जो स्पष्ट करती है कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में स्टॉक मौजूद है। गन्ने की फसल पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में बताते हुए सचिव ने कहा कि 'रेड रॉट' और 'टॉप बोरर' नामक रोगों के अलावा अधिक बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद सितंबर 2026 के अंत तक देश में 33-35 लाख टन चीनी का भंडार रहने का अनुमान है।

सरकार के एहतियाती और भविष्य के कदम

बाजार में स्थिरता लाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति 31 अक्टूबर तक दी गई है।
  • कारोबारियों और आइसक्रीम एवं कोल्ड ड्रिंक्स बनाने वाले बड़े उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा लागू की गई है।
  • सरकार कारोबारियों के लिए मौजूदा 400 टन की भंडार सीमा को और घटाने पर सक्रियता से विचार कर रही है।
  • 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को भी अपनी 15 दिन की खपत से अधिक स्टॉक रखने की मनाही होगी।

अक्टूबर के मध्य से पेराई सत्र शुरू होने के बाद बाजार में करीब 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध हो जाएगी। सरकार को पूरा भरोसा है कि त्योहारी सीजन के दौरान आम जनता को चीनी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और इन प्रशासनिक फैसलों से कीमतों में जल्द ही सुधार देखने को मिलेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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