पाकिस्तान की सैन्य ताकत में बड़ा फेरबदल: आसिम मुनीर ने अपने करीबी जनरल सैयद आमिर रजा को सौंपी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजनीति एक दिन पहले 16
पाकिस्तान में सैन्य ढांचे के पुनर्गठन के बीच फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने जनरल सैयद आमिर रजा को नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का कमांडर नियुक्त किया है, जो पाकिस्तान की रणनीतिक और सैन्य गतिविधियों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

पाकिस्तान में सैन्य कमान का नया चेहरा

पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं में लगातार हो रहे बदलावों के बीच एक और बड़ी हलचल सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही पाकिस्तानी सेना के ढांचे में व्यापक परिवर्तन किए जा रहे हैं। इन बदलावों के केंद्र में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हैं, जिनका प्रभाव और शक्ति लगातार बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की सरकार के दौरान आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाए जाने के बाद, अब उन्होंने सैन्य ढांचे को अपनी सुविधानुसार ढालना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, आसिम मुनीर ने अपने बेहद करीबी और भरोसेमंद माने जाने वाले जनरल सैयद आमिर रजा को नवगठित नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का कमांडर नियुक्त किया है। यह पद मुनीर के बाद पाकिस्तान की सेना में दूसरे सबसे शक्तिशाली सैन्य अधिकारी का माना जा रहा है।

नई सैन्य संरचना और उसका महत्व

आसिम मुनीर ने जिस तरह से प्रमुख पदों पर अपनी पसंद के अधिकारियों को तैनात किया है, उससे यह स्पष्ट है कि वे न केवल थल सेना, बल्कि नौसेना और वायुसेना पर भी अपनी पकड़ को बेहद मजबूत करना चाहते हैं। जनरल सैयद आमिर रजा की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण नेशनल स्ट्रैटेजिक फोर्स का संचालन करना है। रजा का काम इन रणनीतिक बलों की ऑपरेशनल गतिविधियों को संभालना होगा। चूँकि आसिम मुनीर का रुख भारत के प्रति बेहद आक्रामक और शत्रुतापूर्ण रहा है, इसलिए जनरल रजा की नई भूमिका पर नई दिल्ली की विशेष नजर है। यह माना जा रहा है कि जनरल रजा फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की नीतियों को और अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

क्यों बनी यह नई नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड

पाकिस्तान की सैन्य कमान व्यवस्था में हाल के संवैधानिक और कानूनी परिवर्तनों के तहत यह नई व्यवस्था लागू की गई है। लेफ्टिनेंट जनरल से पदोन्नत होकर 4 सितारा जनरल बने सैयद आमिर रजा को कमांडर नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (CNSC) की कमान सौंपी गई है। यह नया पद पाकिस्तान की तीनों सेनाओं यानी थल सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक कमानों को एक ही साझा ऑपरेशनल ढांचे में लाने के लिए बनाया गया है। जिस समय यह नियुक्ति हुई है, उसी दौरान आसिम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के रूप में सर्वोच्च सैन्य अधिकार भी प्राप्त हुए हैं। हालांकि, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े अंतिम फैसले अभी भी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली नेशनल कमांड अथॉरिटी के पास ही सुरक्षित हैं, लेकिन सैन्य ऑपरेशंस के समन्वय में अब वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व की भूमिका अधिक केंद्रीकृत और स्पष्ट हो गई है।

27वें संविधान संशोधन का प्रभाव

पाकिस्तान में सैन्य कमान के इस नए स्वरूप की नींव पिछले साल नवंबर में लागू हुए 27वें संविधान संशोधन के माध्यम से रखी गई थी। इसी संशोधन के तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का नया पद सृजित किया गया, जिस पर आसिम मुनीर पहले व्यक्ति के रूप में आसीन हुए। इस व्यवस्था ने मुनीर को तीनों सेनाओं के ऊपर एक सर्वशक्तिमान सैन्य भूमिका प्रदान कर दी है। इसी पुनर्गठन प्रक्रिया का हिस्सा कमांडर नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का पद भी है। हालांकि आर्मी एक्ट के तहत इस पद पर नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, लेकिन इसके लिए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज की सिफारिश अनिवार्य है। इस पद का कार्यकाल तीन साल तय किया गया है और इसका प्राथमिक कार्य सेना, नौसेना और वायुसेना के रणनीतिक ऑपरेशंस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

कौन हैं जनरल सैयद आमिर रजा

जनरल सैयद आमिर रजा पाकिस्तान सेना के एक अनुभवी अधिकारी रहे हैं। उनका सैन्य करियर काफी लंबा और विविध रहा है। उन्हें 1988 में 6th Lancers के साथ कमीशन मिला था। उन्होंने अपने करियर के दौरान बख्तरबंद इकाइयों से लेकर इन्फैंट्री ब्रिगेड तक की कमान संभाली है। उन्होंने दक्षिण वजीरिस्तान में इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व किया, साथ ही एक इन्फैंट्री डिवीजन और लाहौर स्थित IV Corps के कमांडर के रूप में भी काम किया है। रजा के पास पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन क्षेत्र की महत्वपूर्ण संस्था हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला के संचालन का भी अनुभव है। इसके अलावा, उन्होंने सैन्य हथियारों के महानिदेशालय और II Corps में चीफ ऑफ स्टाफ जैसे पदों पर कार्य किया है। भारत के साथ पिछले साल हुए संघर्ष के बाद पाकिस्तानी सेना के पुनर्गठन और नई आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड की स्थापना में उनकी भूमिका को बहुत अहम माना जाता है।

पदोन्नति और वरिष्ठता सूची का विवाद

जनरल सैयद आमिर रजा की पदोन्नति चर्चा का विषय इसलिए भी बनी हुई है, क्योंकि वे लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर रहते हुए वरिष्ठता सूची में काफी नीचे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब उन्हें 4 सितारा जनरल बनाकर CNSC की जिम्मेदारी दी गई, तब वे वरिष्ठता क्रम में आठवें स्थान पर थे। उनकी इस नियुक्ति से लेफ्टिनेंट जनरल इनाम हैदर मलिक, फैयाज हुसैन शाह, नौमान जकारिया, मुहम्मद जफर इकबाल, अहसन गुलरेज और शाहिद इम्तियाज जैसे कई वरिष्ठ अधिकारी पीछे छूट गए हैं। जबकि लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक को ISI के महानिदेशक के रूप में बनाए रखा गया है। यह स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था में अब शक्ति केवल चुनिंदा अधिकारियों के हाथों में सिमट गई है, जो सीधे तौर पर आसिम मुनीर के रसूख को दर्शाता है।

भारत के लिए इस बदलाव के मायने

भारत के लिहाज से पाकिस्तान की इस सैन्य पुनर्गठन प्रक्रिया का विशेष महत्व है। चूँकि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु हथियार संपन्न देश हैं, इसलिए उनकी कमान संरचना में कोई भी बदलाव रणनीतिक दृष्टिकोण से संवेदनशील होता है। जनरल रजा को तीनों सेनाओं की रणनीतिक कमानों के कॉमन ऑपरेशनल स्ट्रक्चर की जिम्मेदारी मिलना भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत अब पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं, नई रॉकेट फोर्स और किसी भी संयुक्त सैन्य अभ्यास पर पैनी नजर रखेगा। जनरल रजा का अनुभव पाकिस्तान के रॉकेट और मिसाइल बलों को और अधिक एकीकृत करने का है, जिससे भविष्य में सीमा पार से खतरों के प्रति भारत को अपनी सैन्य रणनीति का नए सिरे से आकलन करना होगा।

क्या परमाणु बम की चाबी रजा के पास है

यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि CNSC की नई भूमिका का मतलब यह नहीं है कि परमाणु हथियारों के बटन का नियंत्रण अब जनरल रजा के पास है। पाकिस्तान की परमाणु नीति और रणनीतिक हथियारों के उपयोग से संबंधित अंतिम निर्णय लेने का अधिकार अभी भी औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली नेशनल कमांड अथॉरिटी के पास ही है। इसलिए जनरल रजा को 'परमाणु कमांडर' कहना गलत होगा। उनकी मुख्य भूमिका रणनीतिक बलों के ऑपरेशंस को संचालित करने और सेना के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय बनाने की है। बावजूद इसके, सैन्य कमान की श्रृंखला में उनका स्थान अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि वह पाकिस्तान की रणनीतिक क्षमताओं के संचालन में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गए हैं।

आसिम मुनीर के बढ़ते वर्चस्व का संकेत

जनरल सैयद आमिर रजा की यह नियुक्ति आसिम मुनीर की बढ़ती सैन्य ताकत का एक सीधा प्रदर्शन है। नए ढांचे में मुनीर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज के रूप में सर्वोच्च स्थान पर हैं और CNSC उनके नीचे काम करने वाला एक महत्वपूर्ण विंग है। इससे पाकिस्तान की सैन्य कमान में अधिकारों का जबरदस्त केंद्रीकरण हुआ है। आने वाले समय में पाकिस्तान की मिसाइल प्रणालियों, रणनीतिक हथियारों के इस्तेमाल और संयुक्त युद्ध योजनाओं में CNSC की भूमिका बेहद प्रभावी रहेगी। यह स्पष्ट है कि आसिम मुनीर पाकिस्तान की पूरी सैन्य मशीनरी को अपनी सीधी निगरानी में लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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