कनाडा का डोनाल्ड ट्रंप को करारा जवाब, 600 से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लागू विश्व 3 घंटे पहले 8
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक युद्ध अब और गहरा गया है। ओटावा ने वॉशिंगटन के हालिया कदमों का जवाब देते हुए 629 अमेरिकी वस्तुओं पर भारी शुल्क लगा दिया है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं।

कनाडा ने शुरू किया ट्रेड वॉर का नया अध्याय

अमेरिका और कनाडा के आपसी व्यापारिक संबंधों में अब तल्खी चरम पर पहुंच चुकी है। कनाडा ने सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को चुनौती देते हुए अमेरिका से आयात होने वाली 600 से अधिक वस्तुओं पर 50 फीसदी तक का जवाबी टैरिफ लगा दिया है। यह कदम दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव को एक नए स्तर पर ले गया है। ओटावा और वॉशिंगटन के बीच हुई बातचीत के बेनतीजा रहने के बाद यह फैसला लिया गया है। ये नए नियम मंगलवार 8 सितंबर को रात 12:01 बजे से आधिकारिक तौर पर प्रभावी हो चुके हैं।

टैरिफ के दायरे में कौन से सामान और कितना असर

कनाडा सरकार द्वारा लागू किए गए इस आदेश में कुल 629 तरह की श्रेणियों को शामिल किया गया है। इन सामानों का आयात मूल्य हर साल लगभग 27.6 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब 20 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है। इन पर लगाए गए शुल्क की दरें 15 फीसदी से शुरू होकर 50 फीसदी तक जाती हैं। इन उत्पादों में प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

  • स्टील और उससे बने उत्पाद
  • विभिन्न प्रकार के फर्नीचर
  • कपड़ा उद्योग से जुड़ी वस्तुएं
  • इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान

शुरुआती योजना में कनाडा 874 तरह के सामान पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहा था, लेकिन बाद में मछली और समुद्री खाद्य पदार्थों की 254 श्रेणियों को सूची से हटा दिया गया और 9 अन्य उत्पादों को इसमें जोड़ा गया है।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की अपील

इस व्यापारिक संकट के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने देशवासियों और कारोबारियों को एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अमेरिका पर निर्भरता कम करने की पुरजोर वकालत की है। कार्नी ने एक वीडियो संदेश के जरिए कहा कि कनाडा के पास अपनी अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि व्यापार के तौर-तरीकों में किए जा रहे इस बदलाव की एक आर्थिक कीमत जरूर चुकानी होगी, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने का नुकसान इससे कहीं अधिक विनाशकारी हो सकता है।

वॉशिंगटन पर दबाव की रणनीति

कनाडा के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह जवाबी कार्रवाई वॉशिंगटन पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाने का एक सोची-समझी रणनीति है। इन उपायों से अमेरिका के मिशिगन और ओहियो जैसे औद्योगिक रूप से समृद्ध राज्यों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। दरअसल, यह फैसला अमेरिका द्वारा पिछले महीने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के सामान पर लगाए गए टैरिफ के जवाब में लिया गया है। पिछले अमेरिकी फैसलों ने वाइन, डेयरी उत्पादों, सीमेंट, कपड़ों, फिशिंग रॉड और हॉकी के उपकरणों जैसे क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया था।

USMCA समझौते का भविष्य संकट में

इस बढ़ते विवाद ने अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस समझौते ने दशकों से उत्तरी अमेरिका की तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को सुचारू बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। आंकड़ों के अनुसार, कनाडा अपने कुल निर्यात का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को ही भेजता है। हालांकि, मौजूदा वर्ष में USMCA के तहत प्राप्त छूट के चलते करीब 80 प्रतिशत निर्यात शुल्क मुक्त रहा है, लेकिन अब ये नए टैरिफ इस संतुलन को बिगाड़ने का काम करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप का दबाव और भविष्य की चेतावनी

टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया के जरिए लगातार कनाडा पर निशाना साध रहे हैं। मंगलवार को ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर चेतावनी दी कि कनाडाई विमान निर्माता कंपनी बॉम्बार्डियर को अमेरिकी बाजार में विमान बेचने की अनुमति तब तक नहीं मिलेगी, जब तक वे अमेरिका में विनिर्माण इकाई नहीं लगाते। हालांकि, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक सरकारी आदेश जारी नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने 1 जनवरी से कनाडाई कारों, ट्रकों और ऑटोमोटिव पार्ट्स पर अमेरिकी टैरिफ को बढ़ाकर 50 फीसदी तक करने की धमकी भी दे दी है, जिससे आने वाले समय में तनाव और बढ़ने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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