राजस्थान
एक घंटा पहले
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कोटा मामले ने पकड़ा अंतरराष्ट्रीय रुख
कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की दुखद मौत और कथित रूप से प्रभावहीन ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के उपयोग का मामला अब स्थानीय सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस संवेदनशील मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है और भारत सरकार तथा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से इस पूरे घटनाक्रम पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के कारण भारतीय स्वास्थ्य तंत्र और दवा नियामक संस्थाओं में हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई है।
WHO की ओर से मांगी गई मुख्य जानकारियां
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने केवल घटना की जानकारी ही नहीं ली है, बल्कि भारतीय अधिकारियों से कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टीकरण भी मांगा है। वैश्विक स्वास्थ्य संस्था ने निम्नलिखित बिंदुओं पर भारत सरकार से जवाब तलब किया है:
- विवादित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के उस विशेष बैच की विस्तृत गुणवत्ता जांच रिपोर्ट।
- इस मामले में अब तक जारी किए गए सभी रिकॉल ऑर्डर और सुरक्षा अलर्ट का ब्योरा।
- दवा की वैश्विक सप्लाई चेन की वर्तमान स्थिति और क्या यह इंजेक्शन अन्य देशों को भी निर्यात किया गया था।
- इस पूरे प्रकरण में अब तक की गई प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की टाइमलाइन।
WHO ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए यह स्पष्ट किया है कि वे इस बात की गहन जांच चाहते हैं कि क्या दूषित या मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले इंजेक्शन किसी और देश में तो नहीं भेजे गए।
जैक्सन लैबोरेट्री पर बढ़ी वैश्विक निगरानी
इस पूरे मामले के केंद्र में दवा निर्माता कंपनी जैक्सन लैबोरेट्री है। सूत्रों के अनुसार, इस कंपनी के पुराने रिकॉर्ड पहले से ही जांच के दायरे में हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास इस लैबोरेट्री के 11 अन्य उत्पादों का विवरण पहले से ही मौजूद है, जो विभिन्न कारणों से रिकॉर्ड में दर्ज हैं। यही कारण है कि कोटा की घटना के बाद अब यह कंपनी वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की सीधी और कड़ी निगरानी में आ गई है।
प्रसूताओं की मौत और दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
चिकित्सा जगत में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का उपयोग प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए एक जीवन रक्षक दवा के रूप में किया जाता है। कोटा मेडिकल कॉलेज में इसके कथित रूप से फेल होने के बाद कई माताओं ने अपनी जान गंवा दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब भारत सरकार से प्रसूताओं की मौत और इंजेक्शन की गुणवत्ता के बीच के संभावित संबंध पर वैज्ञानिक रिपोर्ट मांगी है।
यह अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप भारत की दवा निर्माण मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन इस रिपोर्ट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को क्या जवाब देते हैं। इस मामले ने न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दवा सुरक्षा के मानकों को लेकर बहस छेड़ दी है, जिससे भविष्य में दवाओं की खरीद और वितरण प्रक्रिया में कड़े नियमों की संभावना बढ़ गई है।
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