ममता सरकार के कार्यकाल की फाइलों की होगी जांच, CAG रिपोर्ट से तृणमूल कांग्रेस की बढ़ सकती है मुश्किलें पश्चिम बंगाल एक दिन पहले 5
पश्चिम बंगाल में नई सरकार ने पिछले चार वर्षों की लंबित CAG रिपोर्ट को विधानसभा में रखने का फैसला लिया है, जिससे राज्य में बड़े राजनीतिक विवाद के आसार हैं।

वित्तीय अनियमितताओं की खुलेगी पोल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। राज्य के वित्त मंत्री डॉ. स्वप्न दासगुप्ता ने घोषणा की है कि नई सरकार जल्द ही विधानसभा में कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की उन रिपोर्टों को पेश करेगी जो लंबे समय से लंबित थीं। ये रिपोर्ट मुख्य रूप से पिछले चार वित्तीय वर्षों यानी 2021-22 से 2024-25 के बीच की हैं।

टीएमसी की बढ़ेगी सियासी परेशानी

आरोप है कि पिछली ममता बनर्जी सरकार ने इन महत्वपूर्ण ऑडिट रिपोर्टों को दबाकर रखा था। अब इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से तत्कालीन सरकार पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लग सकते हैं। जानकारों का मानना है कि इस कदम से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है।

क्या हैं ऑडिट रिपोर्ट में मुख्य बिंदु

सामने आ रही जानकारी के अनुसार, इन ऑडिट दस्तावेजों में कई बड़े वित्तीय गड़बड़ी के मामले सामने आ सकते हैं। रिपोर्ट में निम्नलिखित प्रमुख विसंगतियों का जिक्र होने की संभावना है:

  • केंद्रीय अनुदान के लिए जारी किए गए यूटिलाइज़ेशन सर्टिफिकेट का बड़ी संख्या में गायब होना।
  • पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान जमा किए गए लेकिन आधिकारिक रूप से सबमिट न किए गए विस्तृत आकस्मिक बिल।

इन खुलासों के बाद राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि ऑडिटिंग दस्तावेजों में मिली खामियां सीधे तौर पर पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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