नाग पंचमी पर करें कालसर्प दोष से मुक्ति के अचूक उपाय, पूजा के दौरान रखें इन खास बातों का ध्यान धर्म एक घंटा पहले 3
नाग पंचमी के पावन अवसर पर कालसर्प दोष की शांति के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं। 17 अगस्त को आने वाले इस पर्व पर राहु-केतु के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए विशेष अनुष्ठान किए जा सकते हैं।

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देव की विधि-विधान से पूजा करने की प्राचीन परंपरा है। इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जा रही है। ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि नाग पंचमी के अवसर पर राहु-केतु से उत्पन्न दोषों की शांति के लिए किए गए उपाय काफी प्रभावशाली माने जाते हैं। विशेष रूप से जो लोग कालसर्प दोष के कारण जीवन में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह दिन अत्यंत शुभ फलदायी साबित हो सकता है।

क्या होता है कालसर्प दोष

ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सातों ग्रह राहु और केतु की धुरी के बीच में आ जाते हैं, तो उस स्थिति को कालसर्प योग या कालसर्प दोष कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दोष के चलते व्यक्ति को अपने जीवन में कदम-कदम पर बाधाएं, लगातार मानसिक तनाव और उतार-चढ़ाव भरी आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ता है। इस दोष की नकारात्मकता को कम करने के लिए नाग पंचमी पर राहु और केतु को शांत करने के विशेष उपाय किए जाते हैं।

पूजा के प्रमुख उपाय

  • चांदी के नाग-नागिन: सनातन परंपरा के अनुसार, इस दिन चांदी या तांबे से बने नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करना लाभकारी है। इन्हें कच्चे दूध और शुद्ध जल से अभिषेक करने के बाद अपनी मनोकामनाएं मन में दोहराएं। पूजा के बाद इस जोड़े को किसी बहते हुए जल में प्रवाहित करने से राहु-केतु संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
  • शिवलिंग का अभिषेक: भगवान शिव की पूजा नाग पंचमी पर विशेष फल देती है। एक तांबे के लोटे में जल लें और उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, काले तिल तथा गंगाजल मिलाएं। इस मिश्रण को शिवलिंग पर अर्पित करते समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें या महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण करें।
  • रुद्राक्ष और मोर पंख: कालसर्प दोष की शांति के लिए 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना जाता है। साथ ही घर के प्रवेश द्वार और मंदिर में मोर पंख रखने से भी नकारात्मकता दूर होती है। चूंकि मोर को नाग का शत्रु माना गया है, इसलिए मोर पंख राहु के दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने में सहायक होता है।
  • नाग स्तोत्र का पाठ और दान: नाग पंचमी के दिन श्री नवनाग स्तोत्र का 11 बार पाठ करना चाहिए। पूजा संपन्न होने के बाद जरूरतमंदों को काले उड़द, काले तिल, नीले रंग के कपड़े और दक्षिणा का दान करने से कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर होती हैं और रुके हुए कामों में गति आती है।
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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