ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन की वापसी का ऐलान विश्व एक घंटा पहले 7
मध्य-पूर्व में लंबे समय से तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन को वापस बुलाया जा रहा है। सैनिकों के गिरते मानसिक स्वास्थ्य और थकान की रिपोर्टों के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है।

लंबे मिशन से वापसी की तैयारी में USS अब्राहम लिंकन

अमेरिकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ ने हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका का शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन अपने निर्धारित रोटेशन के तहत जल्द ही स्वदेश वापसी करेगा। यह जहाज पिछले 250 से अधिक दिनों से समुद्र में लगातार तैनात था। इस तैनाती के दौरान जहाज पर सवार नाविकों के मानसिक स्वास्थ्य और गिरते हुए मनोबल से जुड़ी खबरों ने न केवल अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों, बल्कि वहां तैनात सैनिकों के परिवारों के बीच भी गहरी चिंता पैदा कर दी थी।

प्रशासन ने सुरक्षा को बताया प्राथमिकता

हंग काओ ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात पर जोर दिया है कि एयरक्राफ्ट कैरियर ने अपने मिशन को अत्यंत गौरवपूर्ण तरीके से अंजाम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाज का वापस लौटना पहले से तय रोटेशन का हिस्सा है। काओ के शब्दों में, USS अब्राहम लिंकन ने अपनी तैनाती को शानदार ढंग से पूरा किया है और अब समय आ गया है कि यह अपने घर लौटे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि नौसेना के मरीन और नाविकों की सुरक्षा और उनका कल्याण ही विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नाविकों की बढ़ती परेशानियां और चिंता

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगातार 250 दिनों से अधिक की तैनाती के कारण जहाज पर तैनात सैनिकों के बीच थकान और मानसिक तनाव के लक्षण देखे गए थे। इस स्थिति ने अमेरिकी सांसदों को भी सक्रिय कर दिया है। बताया जा रहा है कि USS अब्राहम लिंकन पिछले 200 दिनों से किसी भी बंदरगाह पर नहीं रुका है, जिसके चलते चालक दल पर शारीरिक और मानसिक दबाव लगातार बना हुआ है।

युद्ध जैसी परिस्थितियों में लंबी तैनाती की चुनौतियां

ईरान के साथ चल रहे तनावपूर्ण माहौल में अमेरिकी ऑपरेशंस को समर्थन देने के लिए इस कैरियर को पश्चिमी एशिया में भेजा गया था। यह सैन्य अभियान अब अपने छठे महीने में प्रवेश कर चुका है। हंग काओ ने माना कि मिशन की तात्कालिक आवश्यकताओं को देखते हुए ही इस तैनाती को लंबा खींचा गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि युद्ध की स्थितियों में सैनिकों को लंबे समय तक तैनात रखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। काओ ने कहा कि युद्ध किसी नर्क से कम नहीं होता और यह सैनिकों के सामान्य जीवन और रूटीन को पूरी तरह से तहस-नहस कर देता है।

सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर संतुलन बनाना जरूरी

सैन्य नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती युद्ध की रणनीतिक जरूरत और अपने जवानों की भलाई के बीच एक उचित संतुलन बनाए रखने की है। काओ के अनुसार, लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों में अनिश्चितताएं होना लाजिमी है, लेकिन सैनिकों के स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती। हाल ही में ऐसी खबरें भी सामने आई थीं जिनमें दावा किया गया था कि जहाज पर तैनात कुछ नौसैनिकों ने मानसिक तनाव के चलते जहाज से कूदने जैसा घातक कदम उठाने की कोशिश की थी, जिसने प्रशासन को इन चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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