जंगल के बीच छिपा रहस्यमय देवझिरी कुंड, जिसके जल को लोग मानते हैं रोगों की दवा मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 1
खरगोन जिले के मंडलेश्वर के घने जंगल में स्थित देवझिरी कुंड को लेकर मान्यता है कि इसके जल में स्नान करने से चर्म रोग, लकवा और मानसिक परेशानियों में राहत मिलती है। साल भर बहता रहने वाला इसका जलस्रोत आज भी रहस्य बना हुआ है।

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में कई प्राचीन झिरे, बावड़ियां और कुंड मौजूद हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई हैं। मंडलेश्वर के घने जंगलों के बीच बसा प्रसिद्ध देवझिरी कुंड भी इन्हीं में शामिल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पवित्र झीरे के पानी में स्नान करने से चर्म रोग, लकवा और मानसिक परेशानियों में राहत मिलती है, और यही वजह है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां खिंचे चले आते हैं।

कहां स्थित है यह पवित्र कुंड

देवझिरी कुंड मंडलेश्वर शहर से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर कसरावद रोड स्थित फांसी बेड़ी स्मारक के पास घने जंगल में मौजूद है। यह जगह नर्मदा नदी से कुछ दूरी पर है। यहां तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। मुख्य सड़क से पगडंडी के सहारे जंगल के बीच होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के मौसम में यहां तक पहुंच पाना और भी मुश्किल हो जाता है।

बारिश में जलमग्न हो जाता है पूरा इलाका

स्थानीय लोगों के मुताबिक बरसात के दिनों में नर्मदा नदी का बैक वॉटर आने से यह पूरा क्षेत्र पानी में डूब जाता है। कई बार कुंड भी जलमग्न हो जाता है, लेकिन जैसे ही जलस्तर घटता है, कुंड का पानी फिर से उतना ही साफ और स्वच्छ नजर आने लगता है। यही बात लोगों को सबसे ज्यादा हैरान करती है।

चट्टान के नीचे बना प्राकृतिक कुंड

देवझिरी एक बड़ी चट्टान के नीचे बना प्राकृतिक कुंड है। इसकी गहराई और चौड़ाई इतनी है कि तीन लोग एक साथ बैठकर आराम से स्नान कर सकते हैं। लंबे समय तक घने जंगल की वजह से यहां लोगों की आवाजाही बेहद कम रही। ग्रामीण बताते हैं कि कुछ साल पहले मनोज कुमार सेन उर्फ चार्ली ने इस स्थान को खोजकर दोबारा लोगों के सामने लाने का काम किया।

अब होती है देखरेख और पूजा-पाठ

फिलहाल मनोज कुमार ही इस स्थान की देखरेख और पूजा-पाठ संभालते हैं। उन्होंने लोगों के सहयोग से आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित किया, जिसके बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। अब बड़ी संख्या में लोग देवझिरी पहुंचकर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं।

बातचीत में मनोज चार्ली ने बताया कि वे करीब 40 वर्षों से इस स्थान पर आते रहे हैं। उनके अनुसार झीरे के भीतर गौ माता के थन जैसी आकृति बनी हुई है, जिनसे पूरे साल लगातार पानी निकलता रहता है। यही कारण है कि यह कुंड कभी नहीं सूखता। झीरे के पास नीलकंठेश्वर महादेव विराजमान हैं, जबकि चट्टानों पर शेषनाग की आकृति भी दिखाई देती है।

चर्म रोग और लकवा में राहत का दावा

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र झीरे में स्नान करने से लकवा, चर्म रोग और मानसिक परेशानियों में आराम मिलता है। कई श्रद्धालु नियमित रूप से यहां स्नान के लिए आते हैं। लोगों का दावा है कि झीरे का पानी बेहद स्वच्छ और मीठा है, इसी कारण कई लोग इसे सीधे पीने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं।

पानी का स्रोत बना सबसे बड़ा रहस्य

देवझिरी कुंड को लेकर सबसे बड़ा रहस्य इसके पानी के स्रोत का है। यह स्थान नर्मदा नदी से काफी ऊंचाई पर मौजूद है, फिर भी यहां सालभर लगातार पानी आता रहता है। लोग आज तक यह नहीं समझ पाए हैं कि आखिर इस चट्टान के नीचे बने कुंड में पानी कहां से पहुंचता है।

गुप्तेश्वर महादेव से जोड़ते हैं लोग

ग्रामीणों का मानना है कि मंडलेश्वर के प्रसिद्ध गुप्तेश्वर महादेव मंदिर की गुफा में मौजूद कुंड, गंगाझिरा और देवझिरी का पानी आपस में जुड़ा हुआ है। इसी आस्था और रहस्य के चलते लोगों ने इस स्थान को पवित्र देवझिरी नाम दिया। आज यह जगह धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक रहस्य का भी केंद्र बनी हुई है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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