मध्य प्रदेश
9 घंटे पहले
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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में जो बदलाव आया है, उसे चमत्कार कहना गलत नहीं होगा। कभी अतिक्रमण और अवैध कटाई के चलते यह इलाका पूरी तरह उजड़ चुका था, जंगल लगातार सिमट रहे थे और हरियाली खत्म होने के कगार पर पहुंच गई थी। लेकिन अब वही जमीन दोबारा घने जंगल का रूप लेती दिख रही है।
कैसे उजड़ता गया जंगल
गुड़ी रेंज में लंबे समय से अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बना हुआ था। वन भूमि पर कब्जा कर खेती की जाने लगी थी और देखते ही देखते पूरा क्षेत्र बंजर होता चला गया। खासकर वर्ष 2018 के बाद अतिक्रमण की रफ्तार तेज हो गई, जिससे जंगल का अस्तित्व ही संकट में आ गया। हालत यह हो गई थी कि यह इलाका किसी सूखे रेगिस्तान जैसा नजर आने लगा था।
वन विभाग का सख्त अभियान
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए वन विभाग ने कड़े कदम उठाए। वर्ष 2024-25 में विशेष अभियान चलाकर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नहारमाल और भिलाई खेड़ा क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इस दौरान कई बार अतिक्रमणकारियों के विरोध और झड़प जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन वनकर्मी पीछे हटने के बजाय लगातार कार्रवाई करते रहे।
उजड़ी जमीन को फिर जंगल बनाने की योजना
अतिक्रमण हटाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उस जमीन को दोबारा जंगल में तब्दील करने की थी। इसके लिए वन विभाग ने सुनियोजित कार्ययोजना बनाई। रेंजर से लेकर मैदानी कर्मचारियों तक सभी ने मिलकर गश्त बढ़ाई, संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी रखी और बड़े पैमाने पर पौधरोपण शुरू किया।
400 हेक्टेयर में 35 हजार से ज्यादा बांस
करीब 400 हेक्टेयर भूमि पर 35 हजार से अधिक बांस के पौधे लगाए गए। इसके साथ ही बबूल और अन्य स्थानीय प्रजातियों के बीज भी बोए गए, जबकि प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों को संरक्षण दिया गया। लगातार देखरेख, बारिश और अनुकूल वातावरण के चलते इस क्षेत्र में तेजी से हरियाली लौट आई है। जहां पहले सूखी जमीन थी, वहां अब घना जंगल आकार ले रहा है।
वन्यजीवों की वापसी
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस क्षेत्र में अब सिर्फ हरियाली ही नहीं बढ़ी, बल्कि वन्यजीवों की वापसी भी होने लगी है। चीतल, सांभर और तेंदुआ जैसे वन्य प्राणी यहां दोबारा दिखाई देने लगे हैं, जो इस बात का संकेत है कि जंगल धीरे-धीरे अपने पुराने स्वरूप में लौट रहा है।
ड्रोन से निगरानी, 30 कर्मचारी तैनात
इस पूरे क्षेत्र की निगरानी के लिए वन विभाग के करीब 30 कर्मचारी लगातार तैनात हैं। साथ ही आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ड्रोन से भी नजर रखी जा रही है, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो और जंगल सुरक्षित बना रहे।
पर्यावरण की दृष्टि से अहम क्षेत्र
गुड़ी रेंज की एक खास बात यह भी है कि इसकी सीमाएं महाराष्ट्र के जंगलों से जुड़ी हुई हैं, जिससे यहां वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। यह इलाका सतपुड़ा और निमाड़ के विशाल वन क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए पर्यावरण के लिहाज से इसका संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खंडवा के गुड़ी जंगल की यह कहानी एक बड़ी सीख देती है कि अगर मजबूत इरादे, सही योजना और निरंतर प्रयास हों, तो बंजर जमीन को भी दोबारा हरा-भरा जंगल बनाया जा सकता है।
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