कस्तूरी भिंडी की खेती से निमाड़ के किसानों को बंपर मुनाफा, बीज से बनता है परफ्यूम मध्य प्रदेश 3 घंटे पहले 3
खंडवा जिले के जलकुआं गांव में करीब 400 हेक्टेयर में हो रही कस्तूरी भिंडी की खेती किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन गई है। इसके बीजों से इत्र बनता है और बाजार में इनकी कीमत करीब 30 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच रही है।

निमाड़ के खेतों में इन दिनों एक नई फसल की महक फैल रही है और वह है कस्तूरी भिंडी। खंडवा जिले के पंधाना ब्लॉक के ग्राम जलकुआं में करीब 400 हेक्टेयर जमीन पर इस फसल की खेती की जा रही है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके बीजों से इत्र यानी परफ्यूम तैयार होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

क्यों खास है कस्तूरी भिंडी?

पारंपरिक फसलों के मुकाबले कस्तूरी भिंडी की लागत कम है और मुनाफा कहीं ज्यादा। इसके बीज, फल और पौधे का उपयोग औषधीय और सुगंधित उत्पाद बनाने में होता है। बाजार में इसके बीज की कीमत करीब 30 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच रही है, जो इसे किसानों की आय का एक मजबूत स्रोत बनाती है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में इस फसल का रकबा तेजी से बढ़ा है।

महिला किसानों का अहम योगदान

'Krishi Namami Aajivika Farmer Producer Company Limited' से जुड़ी महिला किसानों ने इस फसल को नई ऊंचाई दी है। इन महिलाओं ने महज दो साल में कस्तूरी भिंडी का रकबा दोगुना कर दिया है। कम लागत और पक्के बाजार की वजह से अब ज्यादा से ज्यादा किसान इस फसल की तरफ रुख कर रहे हैं।

बुवाई का सही समय और उपयुक्त मिट्टी

  • बुवाई का सबसे सही समय 15 जून से 30 जून के बीच माना जाता है।
  • बारिश शुरू होने के बाद जब खेत में पर्याप्त नमी आ जाए, तभी बोवनी करनी चाहिए।
  • दोमट या काली मिट्टी सबसे उपयुक्त है, जिसका pH मान 6.5 से 7.5 के बीच हो।
  • गर्म और मध्यम वर्षा वाला मौसम इस फसल के लिए आदर्श होता है।

नवंबर से जनवरी तक चलता है उत्पादन

यह फसल नवंबर महीने से तैयार होना शुरू होती है और जनवरी तक लगातार उत्पादन देती रहती है। इसके बीज, फल और पौधे की मांग पूरे देश में बनी रहती है, जिससे किसानों को बाजार की कोई चिंता नहीं होती।

नीमच मंडी बना बड़ा विपणन केंद्र

Krishi Namami के CEO Sunil Pandole के मुताबिक, कस्तूरी भिंडी के उत्पादों की मांग देशभर में है। नीमच की औषधीय फसल मंडी इसके विपणन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है, जहां से बड़ी कंपनियां यह फसल खरीदकर इत्र और दूसरे उत्पाद तैयार करती हैं। जलकुआं और आसपास के किसानों को उनकी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए स्थानीय स्तर पर और नीमच मंडी के जरिए एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। इससे किसानों को उचित मूल्य भी मिल रहा है।

निमाड़ के किसानों के लिए नई उम्मीद

कम लागत, अच्छी कीमत और पक्के बाजार की तिकड़ी ने कस्तूरी भिंडी को निमाड़ के किसानों की नई उम्मीद बना दिया है। आने वाले समय में यह फसल किसानों की आमदनी बढ़ाने में और भी अहम भूमिका निभा सकती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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