कर्नाटक कांग्रेस में थमी नहीं खींचतान, विभागों के बंटवारे से नाराज दो नेता पहुंचे दिल्ली; DK शिवकुमार की मुश्किलें बढ़ीं भारत 18 घंटे पहले 5
कर्नाटक में पोर्टफोलियो बंटवारे को लेकर असंतोष बरकरार है। बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा और विधायक रिजवान अरशद अपनी नाराजगी लेकर पार्टी आलाकमान से मिलने दिल्ली पहुंच गए हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के अंदर विभागों के बंटवारे को लेकर शुरू हुआ घमासान अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी को बड़ी मशक्कत के बाद शांत किया था, लेकिन अब दो अन्य प्रमुख नेताओं की असहमति ने सरकार के सामने नई चुनौती पेश कर दी है। दोनों ही नेता पार्टी नेतृत्व से बातचीत के इरादे से राजधानी दिल्ली पहुंच चुके हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा और कांग्रेस विधायक रिजवान अरशद आलाकमान से मुलाकात के लिए दिल्ली रवाना हो चुके हैं। इन नेताओं की इस सक्रियता से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि राज्य में कैबिनेट और विभागों के फेरबदल का सिलसिला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

क्या गौड़ा चाहते हैं विभाग का पूरा नियंत्रण?

बेंगलुरु विकास विभाग सौंपे जाने के बावजूद कृष्णा बायरे गौड़ा ने अब तक औपचारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण नहीं किया है। सूत्रों की मानें तो उनकी नाराजगी की वजह यह है कि विभाग तो उन्हें दे दिया गया, लेकिन उसका पूरा नियंत्रण उनके हाथ में नहीं दिया गया। गौड़ा की मांग है कि BDA (बेंगलुरु विकास प्राधिकरण) और BMRDA (बेंगलुरु महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण) को भी उनके मंत्रालय के अधीन लाया जाए। उनका तर्क है कि इन दो बड़ी एजेंसियों के बिना बेंगलुरु विकास मंत्रालय महज एक कमजोर विभाग बनकर रह जाएगा।

कैबिनेट में जगह चाहते हैं रिजवान अरशद

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक रिजवान अरशद भी दिल्ली में डटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने से असंतोष है और वह कैबिनेट में पद हासिल करने के लिए आलाकमान के समक्ष अपनी दावेदारी रख रहे हैं।

रेड्डी का मामला सुलझा, मगर नाराजगी अब भी कायम

यह ताजा संकट ऐसे वक्त में सामने आया है जब महज एक हफ्ते पहले ही सीएम डीके शिवकुमार ने रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे से पैदा हुए विवाद पर काबू पाया था। रेड्डी को सिंचाई विभाग दिया गया था, जिससे नाखुश होकर उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया था। उनका कहना था कि उनसे बेंगलुरु विकास मंत्रालय देने का वादा किया गया था, जो बाद में कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दिया गया। हालांकि एक लंबी देर रात तक चली बैठक के बाद शिवकुमार ने हालात संभालते हुए कहा था, "रामलिंगा रेड्डी मेरे दोस्त हैं। सारे मसले सुलझा लिए गए हैं। यह हमारा पारिवारिक मामला था और अब इस्तीफे का विवाद समाप्त हो चुका है।"

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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