कानपुर देहात: नोन नदी में मछली पकड़ते मिला सेना का संदिग्ध 'मोर्टार', उठाकर भागा युवक तो पुलिस बोली- खिलौना नहीं, फट जाएगा! उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
कानपुर देहात के जसवापुर गांव में नोन नदी के पास मछली पकड़ते समय ग्रामीणों को सेना का संदिग्ध मोर्टार मिला, जिसे एक युवक उठाकर भागने लगा और मौके पर हड़कंप मच गया। पुलिस ने इलाका सील कर झांसी से बम स्क्वॉड और एफएसएल टीम को बुलाया है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात स्थित गजनेर थाना क्षेत्र के जसवापुर गांव में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब नदी और तालाब के किनारे पानी में एक संदिग्ध मोर्टार (मिसाइल जैसी दिखने वाली विस्फोटक वस्तु) नजर आया। पानी में तैरती इस भारी-भरकम और संदिग्ध चीज को देखकर पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को दी।

मामले की संवेदनशीलता और संभावित खतरे को भांपते हुए गजनेर थाना पुलिस भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची और तत्काल सुरक्षा घेरा बनाते हुए पूरे क्षेत्र को सील कर दिया। घटना कितनी गंभीर मानी गई, इसका अंदाजा इसी से लगता है कि जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम के साथ-साथ झांसी से विशेष बम निरोधक दस्ते को भी मौके पर बुलाया गया।

मछली पकड़ते समय अचानक सामने आ गई 'आफत'

यह पूरा घटनाक्रम जसवापुर गांव के पास बहने वाली नोन नदी के एक खड्ड यानी जलभराव वाले हिस्से का है। बुधवार को गांव के कुछ युवक हमेशा की तरह इस तालाबनुमा हिस्से में मछली पकड़ने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी निगाह पानी में डूबी एक अजीब और भारी वस्तु पर पड़ी, जो देखने में बिल्कुल किसी छोटी मिसाइल जैसी लग रही थी।

नदी में मिसाइल जैसी चीज मिलने की खबर तेजी से फैली और देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों ग्रामीण जुट गए। कोई इसे पुरानी मिसाइल बता रहा था तो कोई सेना का बम कह रहा था। भीड़ और संभावित खतरे को देखते हुए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा कारणों से लोगों को घटनास्थल से काफी दूर हटा दिया।

खिलौना समझकर भागने लगा युवक, पुलिस के उड़े होश

इस दौरान एक ऐसा वाकया भी हुआ जिसने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की सांसें थाम दीं। दरअसल, जब पुलिस टीम मौके पर पहुंच ही रही थी, तभी मछली पकड़ रहे गांव के एक लड़के ने उस मोर्टार को उठा लिया और उसे लेकर भागने लगा।

बम जैसी खतरनाक चीज हाथ में लेकर भागते युवक को देखकर पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। तत्परता दिखाते हुए पुलिसकर्मी दौड़े और युवक को पकड़ लिया। पुलिस को अपनी ओर आता देख घबराए युवक ने मोर्टार को वहीं जमीन पर फेंक दिया। इस पर एक पुलिसकर्मी ने उसे डांटते हुए जोर से कहा, ‘ये कोई खिलौना नहीं है, सेना का बम है, फट जाएगा तो चिथड़े उड़ जाएंगे!’

झांसी से पहुंचा बम स्क्वॉड, जांच में जुटी एफएसएल टीम

घटना की सूचना मिलते ही डिप्टी एसपी संजय सिंह और थाना अध्यक्ष सूर्यप्रताप सिंह भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। डीएसपी संजय सिंह ने मीडिया को बताया कि बरामद वस्तु पहली नजर में सेना का ‘मोर्टार’ प्रतीत हो रही है, जो एक बेहद शक्तिशाली विस्फोटक उपकरण होता है।

मिलिट्री ग्रेड के विस्फोटक से जुड़ा मामला होने के कारण तुरंत झांसी से बम निरोधक दस्ते को तलब किया गया। जांच के बाद बम स्क्वॉड की टीम ने बेहद सावधानी के साथ मोर्टार को अपने नियंत्रण में लेकर अपने साथ ले लिया। विशेषज्ञों और FSL की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह मोर्टार सक्रिय था या निष्क्रिय। पुलिस यह भी पड़ताल कर रही है कि आखिर यह मोर्टार इस ग्रामीण इलाके के तालाब तक पहुंचा कैसे।

मोर्टार नया है या पुराना? गहराया सस्पेंस

आमतौर पर ऐसी वस्तुएं बहुत पुरानी और जंग लगी होती हैं, लेकिन जसवापुर गांव के लोगों का कहना है कि यह मोर्टार ज्यादा पुराना नहीं लग रहा। जिस तालाबनुमा हिस्से में यह मिला, वहां यह मिट्टी में नीचे दबा हुआ नहीं था, बल्कि पानी के ऊपरी हिस्से में ही दिखाई दे रहा था। इसी वजह से इसके बहुत पुराने होने की आशंका कम जताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इसे हाल-फिलहाल में किसी ने यहां फेंका है या यह बहकर आया है।

कितना खतरनाक होता है मोर्टार, सेना कैसे करती है इस्तेमाल

बता दें कि मोर्टार का इस्तेमाल मुख्य रूप से भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल युद्ध के मैदान में करते हैं। यह ऐसा हथियार है जिसे दागने पर इसका गोला पहले आसमान की ओर जाता है और फिर पैराबोलिक गति बनाते हुए सीधे निशाने पर गिरकर जोरदार विस्फोट करता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके इस्तेमाल के लिए सैनिकों को दुश्मन के सामने आने की जरूरत नहीं होती।

अगर दुश्मन किसी पहाड़ी, ऊंची दीवार या बंकर के पीछे छिपा हो, तब भी मोर्टार की मदद से उसे निशाना बनाया जा सकता है। वजन में हल्के होने के कारण पैदल सेना इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकती है।

मोर्टार कई आकार के होते हैं। छोटे मोर्टार को सैनिक खुद उठाकर चल सकते हैं, जबकि 81 मिमी और 120 मिमी जैसे बड़े मोर्टार को गाड़ियों पर ले जाया जाता है। सेना का 120 मिमी का बड़ा मोर्टार करीब 7.2 किलोमीटर की दूरी तक बैठे दुश्मन को पल भर में तबाह करने की क्षमता रखता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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